पड़ोसी देश के लोग नहीं कर पा रहे इंटरनेट का इस्तेमाल! जानिए क्या है Internet Load Shedding जिसने खड़ी कर दी नई मुसीबत

पाकिस्तान में बढ़ता बिजली संकट अब सिर्फ घरों और उद्योगों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसका असर डिजिटल दुनिया पर भी साफ दिखाई देने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि वहां इंटरनेट लोड शेडिंग जैसी नई समस्या सामने आ गई है जिसने आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है.
दरअसल, इंटरनेट लोड शेडिंग उस स्थिति को कहा जा रहा है जब लंबे समय तक बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती होती है और इसके चलते मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं. पाकिस्तान में लगातार हो रही बिजली कटौती ने टेलीकॉम नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले मोबाइल टावरों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जब बिजली जाती है तो ये टावर बंद हो जाते हैं और लोगों का कनेक्शन टूट जाता है.
इस समस्या ने अब गंभीर रूप ले लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में पहले से ही बिजली की कमी एक बड़ी चुनौती रही है लेकिन अब इसका असर संचार सेवाओं पर भी पड़ रहा है. लाखों-करोड़ों मोबाइल यूजर्स कॉल करने और इंटरनेट चलाने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और खराब है, जहां नेटवर्क पूरी तरह से गायब हो जाता है.
लोगों की शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही हैं. कॉल ड्रॉप होना आम बात बन गई है और इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी हो गई है कि सामान्य काम करना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार तो नेटवर्क पूरी तरह बंद हो जाता है जिससे घंटों तक लोग ऑनलाइन नहीं आ पाते. इसका सीधा असर कामकाज, पढ़ाई और बिजनेस पर पड़ रहा है.
समस्या की जड़ में मोबाइल टावरों की सीमित बैकअप क्षमता भी है. अधिकतर टावर सिर्फ कुछ घंटों तक ही बैटरी या जनरेटर के सहारे चल पाते हैं जबकि बिजली कटौती उससे कहीं ज्यादा लंबी होती है. कई जगहों पर तो बैकअप की सुविधा भी नहीं है जिससे बिजली जाते ही नेटवर्क ठप हो जाता है.
हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां जनरेटर और डीजल के जरिए टावरों को चालू रखने की कोशिश करती हैं लेकिन बढ़ती ईंधन कीमतों ने इस विकल्प को भी मुश्किल बना दिया है. लगातार महंगे होते तेल के कारण कंपनियों के लिए चौबीसों घंटे नेटवर्क चालू रखना संभव नहीं रह गया है.
इन हालातों ने पाकिस्तान में एक नई चिंता को जन्म दे दिया है जहां अब लोगों को न सिर्फ बिजली की कमी झेलनी पड़ रही है बल्कि इंटरनेट से भी दूर रहना पड़ रहा है. डिजिटल दौर में यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं मानी जा रही.