स्मार्टफोन में फिर आएगा पुराना जमाना! अब खुद बदल सकेंगे बैटरी, इस देश ने किया बड़ा फैसला

स्मार्टफोन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है जो पुराने दिनों की याद ताजा कर सकता है. कभी ऐसा समय था जब फोन की बैटरी खराब होने पर हम खुद ही बैक कवर खोलकर उसे बदल लेते थे. अब वही सुविधा फिर से लौटने की तैयारी में है. European Union ने स्मार्टफोन निर्माण को लेकर नए नियम लागू किए हैं जिनका मकसद डिवाइस को ज्यादा टिकाऊ और आसानी से रिपेयर करने लायक बनाना है.
आने वाले समय में कंपनियों को ऐसे स्मार्टफोन बनाने होंगे जिन्हें यूजर खुद आसानी से खोल सके और बैटरी बदल सके. अभी ज्यादातर फोन पूरी तरह सील पैक होते हैं जिनमें बैटरी निकालना आम लोगों के लिए मुश्किल होता है. लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी और फोन ज्यादा यूजर-फ्रेंडली बनेंगे.
इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और 2027 तक इसका पूरा असर दिखने लगेगा. तब तक कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर्स बिना किसी खास तकनीकी जानकारी के साधारण टूल्स की मदद से अपनी बैटरी खुद बदल सकें. साथ ही, फोन के पार्ट्स लंबे समय तक बाजार में उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा.
इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बढ़ते ई-वेस्ट को कम करना है. अक्सर लोग सिर्फ बैटरी खराब होने पर पूरा फोन बदल देते हैं जबकि बाकी डिवाइस सही काम कर रहा होता है. अगर बैटरी आसानी से बदली जा सके तो फोन की उम्र बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा. इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी घटेगा.
इन नियमों का असर बड़ी कंपनियों जैसे Apple, Samsung और Xiaomi पर साफ नजर आएगा. उन्हें अपने स्मार्टफोन के डिजाइन और निर्माण के तरीके में बड़े बदलाव करने होंगे. अब कंपनियों को ऐसे डिवाइस बनाने पर ध्यान देना पड़ेगा जिन्हें आसानी से रिपेयर किया जा सके.
आम यूजर्स के लिए यह बदलाव काफी फायदेमंद साबित होगा. अब बैटरी खराब होने पर नया फोन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लोग कम खर्च में अपनी बैटरी बदलकर फोन को लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकेंगे. इससे पैसे की बचत भी होगी और बार-बार नया फोन लेने की जरूरत भी कम होगी.
हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ मुश्किलें भी आ सकती हैं. आसानी से खुलने वाले फोन थोड़े मोटे हो सकते हैं और उन्हें पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. भले ही यह नियम यूरोप में लागू हो रहा है लेकिन इसका प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा. बड़ी कंपनियां अलग-अलग बाजारों के लिए अलग डिजाइन बनाने से बचती हैं इसलिए संभव है कि भविष्य में दुनियाभर के स्मार्टफोन्स में यह बदलाव देखने को मिले.