सावधान! फोन के नोटिफिकेशन भी बन सकते हैं जासूस, ऐसे चुपचाप लीक हो रहा है आपका पर्सनल डेटा

आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. हर मिनट आने वाले नोटिफिकेशन हमें अपडेट रखते हैं लेकिन यही छोटी सी सुविधा कभी-कभी हमारी प्राइवेसी के लिए बड़ा जोखिम भी बन सकती है. बहुत से लोग यह नहीं जानते कि नोटिफिकेशन के जरिए उनकी निजी जानकारी अनजाने में बाहर आ सकती है.
जब भी आपके फोन पर कोई नोटिफिकेशन आता है, वह सीधे ऐप से नहीं आता बल्कि पहले सर्वर के जरिए आपके डिवाइस तक पहुंचता है. इस प्रोसेस में यह जानकारी रिकॉर्ड हो सकती है कि किस ऐप ने कब नोटिफिकेशन भेजा. कुछ स्थितियों में नोटिफिकेशन का कंटेंट भी दिखाई दे सकता है खासकर जब ऐप में प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत न हों.
इसके अलावा, अगर आपने लॉक स्क्रीन पर नोटिफिकेशन दिखने की अनुमति दे रखी है तो बिना फोन अनलॉक किए ही कोई भी व्यक्ति आपके मैसेज या अलर्ट देख सकता है. यही सबसे आम और खतरनाक स्थिति होती है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि नोटिफिकेशन हटाने के बाद उनकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कई बार नोटिफिकेशन से जुड़ा डेटा फोन की मेमोरी में सेव रह जाता है.
कुछ खास टूल्स की मदद से पुराने या डिलीट किए गए नोटिफिकेशन को भी दोबारा निकाला जा सकता है. यहां तक कि ऐप हटाने के बाद भी उससे जुड़ी कुछ जानकारी सिस्टम में बची रह सकती है.
WhatsApp और Signal जैसे ऐप्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन देते हैं, जिससे चैट सुरक्षित रहती है. लेकिन अगर नोटिफिकेशन सेटिंग्स सही नहीं हैं तो वही मैसेज स्क्रीन पर दिखाई दे सकता है. कई ऐप्स यूज़र्स को यह विकल्प देते हैं कि वे तय करें कि नोटिफिकेशन में क्या दिखे पूरा मैसेज, सिर्फ नाम या कुछ भी नहीं. सही सेटिंग्स का इस्तेमाल न करने पर प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है.
नोटिफिकेशन सेटिंग्स को समझना और सही तरीके से इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. अगर लॉक स्क्रीन पर प्रीव्यू बंद कर दिया जाए तो काफी हद तक जोखिम कम हो सकता है. साथ ही, हर ऐप को नोटिफिकेशन की अनुमति देना भी जरूरी नहीं होता इसलिए सिर्फ जरूरी ऐप्स को ही एक्सेस देना बेहतर है. मैसेजिंग ऐप्स में भी प्राइवेसी से जुड़ी सेटिंग्स को कस्टमाइज करना चाहिए ताकि संवेदनशील जानकारी स्क्रीन पर न दिखे.