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एक लिंक और पूरा फोन खाली! स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम कैसे भारतीयों को बना रहा है शिकार

एबीपी टेक डेस्क   |  23 Feb 2026 09:26 AM (IST)
एक लिंक और पूरा फोन खाली! स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम कैसे भारतीयों को बना रहा है शिकार

सोचिए, एक शाम आपके फोन पर एक मैसेज आता है कि बिजली का बिल बकाया है और अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो कनेक्शन काट दिया जाएगा. मैसेज में MAHADISCOM का नाम लिखा होता है इसलिए शक भी नहीं होता. साथ में एक नंबर दिया जाता है या फिर लिंक पर डिटेल डालने को कहा जाता है.

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आप कॉल करते हैं तो सामने से कहा जाता है कि सिर्फ 100 रुपये जमा करने हैं. भरोसा दिलाने के लिए तुरंत WhatsApp या SMS पर एक लिंक भेज दिया जाता है. आप लिंक खोलते हैं, बैंक की जानकारी डालते हैं और छोटी-सी रकम का भुगतान कर देते हैं. सब सामान्य लगता है.

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लेकिन करीब 10–15 मिनट बाद फोन फिर बजता है. इस बार मैसेज भुगतान की रसीद का नहीं, बल्कि बैंक अलर्ट का होता है. एक के बाद एक ट्रांजैक्शन में खाते से 6.5 लाख रुपये निकल चुके होते हैं. जब आप दोबारा लिंक देखने की कोशिश करते हैं, वह गायब मिलती है. तब समझ आता है कि एक मैसेज और थोड़े से भरोसे ने आपकी पूरी जमा पूंजी साफ कर दी.

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2022 के बाद से यह स्कैम खासकर बुजुर्ग यूजर्स को निशाना बना रहा है. इसमें ठग किसी बहाने—जैसे बिजली बिल, KYC अपडेट, रिफंड या टेक सपोर्ट के नाम पर आपको स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करने को कहते हैं. जैसे ही आप स्क्रीन शेयर करते हैं स्कैमर्स को आपके फोन पर चल रही हर चीज रियल-टाइम में दिखने लगती है.

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एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मोबाइल फोन पर स्क्रीन शेयर करना सबसे खतरनाक होता है. ठग आपकी बैंकिंग ऐप, OTP, SMS अलर्ट और नोटिफिकेशन तक देख सकते हैं. इतना ही नहीं, वे स्क्रीन को बदलकर आपको भ्रमित कर सकते हैं और खुद आपसे ही ट्रांजैक्शन अप्रूव करवा लेते हैं. इस तरह बिना OTP चुराए भी आपका पैसा उड़ जाता है.

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इन स्कैम्स की सबसे बड़ी ताकत तकनीक नहीं, बल्कि डर और जल्दबाजी है. बिजली कटने, अकाउंट ब्लॉक होने या रिफंड खत्म होने जैसी धमकियां देकर आपको सोचने का वक्त नहीं दिया जाता. कुछ ही मिनटों में ठग आपके पूरे फाइनेंशियल डेटा को समझ लेते हैं और नुकसान कर जाते हैं.

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स्क्रीन-शेयरिंग फ्रॉड अब OTP या फिशिंग स्कैम की जगह नहीं ले रहे बल्कि उन्हें और मजबूत बना रहे हैं. ठग स्क्रीन पर OTP आते हुए भी देख लेते हैं और आपको खुद ही ट्रांजैक्शन करने के लिए मना लेते हैं. यही वजह है कि यह नया तरीका ज्यादा तेज, ज्यादा भरोसेमंद और पकड़ में आने में मुश्किल है.

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अगर कोई मैसेज अचानक डर पैदा करे, जल्दी भुगतान का दबाव डाले या किसी निजी मोबाइल नंबर से आए तो सावधान हो जाइए. सरकारी या बैंक से जुड़े मैसेज हमेशा आधिकारिक आईडी से आते हैं, किसी 10 अंकों के नंबर से नहीं.

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