Bluetooth ऑन रखते ही खतरे में पड़ सकता है बैंक अकाउंट! एक क्लिक में हो सकती है ठगी, ऐसे रखें खुद को सेफ
भीड़-भाड़ वाली जगहों जैसे बस, ट्रेन, मेट्रो, मॉल या मार्केट में साइबर ठग सक्रिय रहते हैं. वे खास सॉफ्टवेयर और डिवाइस की मदद से आस-पास मौजूद उन मोबाइल फोन्स को ढूंढते हैं जिनका ब्लूटूथ ऑन और डिस्कवरेबल होता है.
इसके बाद वे आपके फोन पर पेयरिंग रिक्वेस्ट भेजते हैं. कई बार लोग बिना सोचे-समझे उस रिक्वेस्ट को स्वीकार कर लेते हैं और यहीं से ठगी की शुरुआत हो जाती है.
एक बार कनेक्शन बनते ही ठग आपके फोन में मौजूद जरूरी डेटा तक पहुंच बना सकते हैं. कुछ मामलों में वे मैसेज, कॉन्टैक्ट्स और यहां तक कि बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भी चुरा लेते हैं. इसी तरह के हमलों को ब्लूजैकिंग, ब्लूस्नार्फिंग और ब्लूबगिंग जैसे नाम दिए गए हैं, जिनमें बिना आपकी जानकारी के फोन का कंट्रोल भी हैकर्स के हाथ में जा सकता है.
जब ठग फोन के अंदर घुस जाते हैं तो ओटीपी, बैंक अलर्ट मैसेज और ऐप नोटिफिकेशन उनके लिए आसान हो जाते हैं. यही वजह है कि कई मामलों में लोगों का अकाउंट कुछ ही मिनटों में खाली हो जाता है. सबसे खतरनाक बात यह है कि पीड़ित को अक्सर तब तक भनक नहीं लगती जब तक नुकसान हो चुका होता है.
इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी सी सतर्कता जरूरी है. जब भी ब्लूटूथ का इस्तेमाल खत्म हो जाए, उसे तुरंत बंद कर देना चाहिए. पब्लिक प्लेस में ब्लूटूथ ऑन रखना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए वहां खासतौर पर सावधान रहें. किसी भी अनजान डिवाइस से आई पेयरिंग रिक्वेस्ट को कभी स्वीकार न करें और फोन की सेटिंग में ब्लूटूथ को नॉन-डिस्कवरेबल मोड में रखें ताकि आपका फोन दूसरों को दिखाई ही न दे.