AI Next Big Technology: भविष्य में कितने खतरनाक साबित होंगे क्वांटम कंप्यूटर, एन्क्रिप्टेड सिस्टम को कैसे कर लेंगे हैक?

क्वांटम कंप्यूटिंग आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में से एक मानी जा रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बाद अब पूरी दुनिया की नजर इसी पर टिकी है. Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों का मानना है कि साल 2029 के बाद यह तकनीक इतनी शक्तिशाली हो सकती है कि आज के सुपरकंप्यूटर भी इसके सामने कमजोर पड़ जाएंगे. लेकिन इसी के साथ एक गंभीर चेतावनी भी सामने आई है, जो पूरी इंटरनेट और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को बदल सकती है.
आज हम जिस इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वह एन्क्रिप्शन (Encryption) पर आधारित है. इसका मतलब है कि आपका बैंक पासवर्ड, वॉट्सऐप मैसेज और ऑनलाइन डेटा एक “डिजिटल ताले” में बंद रहता है. इस लोक को सामान्य कंप्यूटर खोल नहीं सकते. लेकिन, दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक 'गूगल' (Google) ने अपने ब्लॉग के जरिए एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने दुनियाभर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है. लेकिन Google ने बताया कि आने वाले समय में क्वांटम कंप्यूटिंग इस सुरक्षा सिस्टम को पूरी तरह से चकनाचूर कर सकती है.
क्वांटम कंप्यूटर को समझने के लिए पहले सामान्य कंप्यूटर को समझना जरूरी है. आज के कंप्यूटर “बिट्स” (0 और 1) पर काम करते हैं. लेकिन क्वांटम कंप्यूटर “क्यूबिट्स” पर काम करते हैं, जो एक साथ 0 और 1 दोनों स्थिति में रह सकते हैं. इसी वजह से ये एक ही समय में कई रास्तों पर काम करके बहुत तेजी से सही जवाब निकाल सकते हैं. यही क्षमता इन्हें सुपरकंप्यूटर से भी कई गुना तेज बनाती है.
साथ ही Google के सीईओ सुंदर पिचाई और उनकी Quantum AI टीम ने कई बार इस खतरे को लेकर चेतावनी दी है. जिसे “Quantum Apocalypse” या “Q-Day” कहा जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, आज जो एन्क्रिप्शन सिस्टम जैसे RSA इस्तेमाल होता है, उसे तोड़ने में सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर को भी हजारों साल लग सकते हैं. लेकिन भविष्य का क्वांटम कंप्यूटर इसे कुछ मिनटों या घंटों में तोड़ सकता है.
Google ने खास तौर पर साल 2029 का जिक्र किया है क्योंकि कंपनी का लक्ष्य है कि उस समय तक वह एक ऐसा क्वांटम कंप्यूटर बना ले जो व्यावसायिक रूप से उपयोगी हो और बहुत कम गलतियां करें. रिपोर्ट्स के अनुसार, Google का लक्ष्य लगभग 10 लाख फिजिकल क्यूबिट्स वाला सिस्टम तैयार करना है. अगर यह तकनीक सफल हो जाती है, तो अन्य देश और कंपनियां भी तेजी से इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी, और यहीं से साइबर सुरक्षा का असली खतरा शुरू हो सकता है.
2029 के बाद सबसे बड़ा बदलाव इंटरनेट सुरक्षा में देखने को मिलेगा. आज के सभी पासवर्ड और एन्क्रिप्शन सिस्टम कमजोर पड़ सकते हैं. इसी कारण दुनिया को एक नई तकनीक की जरूरत होगी, जिसे “Post-Quantum Cryptography (PQC)” कहा जाता है. यह ऐसा सुरक्षा सिस्टम होगा जिसे क्वांटम कंप्यूटर भी आसानी से तोड़ नहीं पाएंगे.
एक और बड़ा खतरा “Store Now, Decrypt Later” है. इसका मतलब है कि हैकर्स आज ही एन्क्रिप्टेड डेटा चुरा रहे हैं और उसे स्टोर कर रहे हैं. उन्हें पता है कि अभी वे इसे पढ़ नहीं सकते, लेकिन 2029 के बाद जब क्वांटम कंप्यूटर शक्तिशाली हो जाएंगे, तब वे पुराने डेटा का ताला खोल सकते हैं. इसमें बैंकिंग जानकारी, रक्षा से जुड़ा डेटा और निजी चैट तक शामिल हो सकते हैं.
हालांकि क्वांटम कंप्यूटर सिर्फ खतरा ही नहीं हैं. इनके फायदे भी बहुत बड़े हैं. यह तकनीक मेडिकल रिसर्च को बदल सकती है. जैसे कैंसर या अल्जाइमर जैसी बीमारियों की दवा खोजने में सालों लगते हैं, क्वांटम कंप्यूटर इसे बहुत तेजी से हल कर सकता है. यह अरबों मॉलिक्यूल्स का एक साथ विश्लेषण करके नई दवाएं खोजने में मदद करेगा.