पेनड्राइव, SSD और क्लाउड में डेटा कैसे सेव होता है? जानें टेक्नोलॉजी

फोन में फोटो सेव करने से लेकर लैपटॉप में जरूरी डॉक्यूमेंट रखने और इंटरनेट पर फाइल अपलोड करने तक, हम हर दिन अलग-अलग तरीकों से डेटा स्टोर करते हैं. इन सभी कामों के पीछे स्टोरेज टेक्नोलॉजी होती है. यह तकनीक डिजिटल फाइलों को अपने पास रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने में मदद करती है स्टोरेज का काम सिर्फ फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट को सेव करना ही नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी होता है कि डेटा कितनी जल्दी खुलेगा, उसे एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक कैसे पहुंचाया जाएगा और उसे लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जा सकेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि पेनड्राइव, SSD और क्लाउड में डेटा कैसे सेव होता है.
डेटा स्टोरेज वह व्यवस्था है, जिसमें डिजिटल जानकारी को फ्यूचर में इस्तेमाल करने के लिए सेव किया जाता है. फोटो, वीडियो, PDF, डॉक्यूमेंट और सॉफ्टवेयर जैसी चीजें स्टोरेज में रखी जाती हैं. कंप्यूटर डेटा को 0 और 1 के रूप में समझता है. इन्हीं बाइनरी नंबरों के जरिए जानकारी स्टोर और पढ़ी जाती है. स्टोरेज की मदद से डिवाइस बंद होने के बाद भी फाइलें सुरक्षित रह सकती है.
हार्ड डिस्क ड्राइव यानी HDD में डेटा को मैग्नेटिक तरीके से स्टोर किया जाता है. इसके अंदर घूमने वाली डिस्क होती हैं, जिनकी सतह पर मैग्नेटिक लेयर लगी होती है. रीड-राइट हेड इस सतह पर डेटा लिखने और उसे पढ़ने का काम करता है. HDD कम कीमत में ज्यादा डेटा रखने के लिए यूजफुल है, हालांकि इसमें चलने वाले मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं, ऐसे में इसकी स्पीड SSD से कम हो सकती है.
SSD में डेटा सेव करने के लिए NAND फ्लैश मेमोरी का इस्तेमाल होता है. इसमें घूमने वाली डिस्क या दूसरे मूविंग पार्ट्स नहीं होते हैं.इसमें इलेक्ट्रिकल सिग्नल के जरिए मेमोरी सेल में जानकारी स्टोर की जाती है. यही वजह है कि SSD डेटा को तेजी से एक्सेस कर सकता है. इससे कंप्यूटर जल्दी शुरू होता है और एप्लिकेशन भी तेजी से खुलते हैं, हालांकि इसकी प्रति गीगाबाइट कीमत आमतौर पर HDD से ज्यादा होती है.
पेनड्राइव भी फ्लैश मेमोरी तकनीक पर काम करती है. इसे USB पोर्ट के जरिए कंप्यूटर या दूसरे डिवाइस से जोड़ा जाता है. इसमें डॉक्यूमेंट, फोटो और दूसरी फाइलें सेव करके एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में ले जाई जा सकती हैं. इसका छोटा साइज इसे आसानी से साथ रखने योग्य बनाता है, हालांकि जरूरी फाइलों की सुरक्षा के लिए सिर्फ पेनड्राइव पर निर्भर रहने की जगह दूसरी जगह बैकअप रखना भी यूजफुल है.
क्लाउड स्टोरेज में डेटा आपके डिवाइस की जगह इंटरनेट के जरिए रिमोट सर्वर पर सेव होता है. जैसे Google Drive, OneDrive और Dropbox, फाइल अपलोड होने के बाद उसे इंटरनेट की मदद से दूसरे डिवाइस पर भी एक्सेस किया जा सकता है. इसके लिए संबंधित अकाउंट और इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत होती है. क्लाउड स्टोरेज की एक खासियत यह भी है कि जरूरत के मुताबिक इसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है, जबकि अपने हार्डवेयर को खरीदने और संभालने की जरूरत कम हो जाती है.
लोकल स्टोरेज में डेटा HDD, SSD या पेनड्राइव जैसे फिजिकल डिवाइस पर रखा जाता है. इसके मुकाबले क्लाउड स्टोरेज में फाइलें दूर मौजूद सर्वर पर रहती हैं और इंटरनेट से एक्सेस की जाती हैं. लोकल स्टोरेज में हार्डवेयर और बैकअप की जिम्मेदारी यूजर की होती है, जबकि क्लाउड सेवाओं में आमतौर पर इस्तेमाल के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है. ऐसे में दोनों तरीकों के अपने फायदे हैं. कई लोग जरूरी डेटा की सुरक्षा के लिए लोकल और क्लाउड स्टोरेज दोनों का इस्तेमाल करते हैं.