हैकर्स और ऑनलाइन ट्रैकिंग से बचाना है डेटा? बदलें ये सेटिंग्स

आजकल वेबसाइट्स कुकीज, ट्रैकिंग पिक्सल और डिवाइस की पहचान करने वाली तकनीकों के जरिए यूजर की एक्टिविटी पर नजर रख सकती हैं. वहीं फोन में दी गई ऐप परमिशन और असुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन भी निजी जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. सिर्फ ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने या प्राइवेट टैब यूज करने से ऑनलाइन ट्रैकिंग पूरी तरह बंद नहीं होती है. ऐसे में कुछ जरूरी सेटिंग्स और आदतों में बदलाव करके डेटा की सुरक्षा बेहतर बनाई जा सकती है. तो आइए जानते हैं कि हैकर्स और ऑनलाइन ट्रैकिंग से डेटा बचाना है तो कौन-सी सेटिंग्स बदलें.
कई वेबसाइट्स कुकीज और दूसरी ट्रैकिंग तकनीकों से आपकी ब्राउजिंग से जुड़ी जानकारी जुटाती हैं. ऐसे में समय-समय पर ब्राउजर की कुकीज क्लियर करें और प्राइवेसी पर ध्यान देने वाले सर्च इंजन यूज करें. ब्राउजिंग पूरी होने के बाद अकाउंट से लॉगआउट करना भी बेहतर आदत है. इसके अलावा गैर जरूरी ऐप्स हटाएं और ऐप परमिशन की समीक्षा करते रहें.
कॉफी शॉप, एयरपोर्ट, होटल और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर मिलने वाला फ्री Wi-Fi सुविधाजनक है, लेकिन इसका यूज करते समय सावधानी जरूरी है. ऐसे नेटवर्क पर बैंक अकाउंट खोलने या क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने से बचें. वित्तीय लेनदेन के लिए सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का यूज करना बेहतर है.
VPN इंटरनेट कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करने और वेबसाइट्स के सामने आपका IP एड्रेस छिपाने में मदद कर सकता है, हालांकि VPN यूज करने से पूरी तरह IP एड्रेस छिपाने की गारंटी नहीं मिलती है. इसकी प्राइवेसी पॉलिसी भी जांचें. वहीं एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और स्टोरेज निजी बातचीत और जरूरी डॉक्यूमेंट्स को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं.
फोन में GPS, वायरलेस कनेक्शन और लोकेशन ट्रैकिंग हमेशा चालू रखने के जगह जरूरत पड़ने पर इनका यूज करें. इससे बिना जरूरत लोकेशन एक्सेस कम करने में मदद मिल सकती है. ऐप्स और फोन का सॉफ्टवेयर भी नियमित रूप से अपडेट करते रहें.
हर वेबसाइट पर एक ही ईमेल आईडी और यूजरनेम यूज करने से अलग-अलग अकाउंट्स को आपस में जोड़ना आसान हो सकता है. जहां जरूरी हो, अलग अकाउंट रखें और निजी जानकारी सीमित शेयर करें. पासवर्ड में बड़े-छोटे अक्षरों और नंबरों का यूज करें. निजी एक्टिविटी के लिए अलग अकाउंट रखने से भी पहचान से जुड़े डिजिटल संकेतों को सीमित करने में मदद मिल सकती है.
फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में डेटा सुरक्षित रखने के लिए स्क्रीन लॉक और स्टोरेज एन्क्रिप्शन का यूज करें. स्क्रीन को पांच मिनट या उससे कम समय में अपने आप लॉक होने के लिए सेट कर सकते हैं. लॉगिन की कई गलत कोशिशों के बाद डिवाइस लॉक होने का ऑप्शन भी यूजफुल है. अनजान स्रोस से आए लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध अटैचमेंट खोलने से बचें.