Google का रेड अलर्ट! करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स खतरे में, ये एक सेटिंग नहीं बदली तो पड़ सकता है भारी
इस चेतावनी की सबसे बड़ी वजह पुराने Android ऑपरेटिंग सिस्टम हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, Android 13 या उससे पुराने वर्जन पर चल रहे स्मार्टफोन सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. दुनिया में आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे ही डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं. अनुमान है कि करीब 40 प्रतिशत स्मार्टफोन अब भी पुराने Android सिस्टम पर चल रहे हैं जिनकी संख्या लगभग एक अरब तक पहुंचती है. इन डिवाइसों के लिए अब नियमित सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं किए जाते जिससे हैकर्स के लिए उनमें सेंध लगाना काफी आसान हो जाता है.
अगर Android वर्जन के हिसाब से देखा जाए, तो सबसे नया Android 16 अभी बहुत कम यूजर्स तक ही पहुंच पाया है. Android 15 पर भी सीमित संख्या में फोन चल रहे हैं. इसके मुकाबले Android 14 और Android 13 अब भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो सिर्फ करीब आधे से थोड़ा ज्यादा स्मार्टफोन ही ऐसे हैं जिन्हें फिलहाल सुरक्षित माना जा सकता है जबकि बाकी डिवाइस संभावित खतरे के घेरे में हैं.
इस स्थिति में यूजर्स के लिए सबसे जरूरी कदम यही है कि वे अपने फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम तुरंत अपडेट करें. अगर आपका स्मार्टफोन किसी पुराने Android वर्जन पर चल रहा है और उसे अब अपडेट नहीं मिल रहा तो वह डिवाइस हैकर्स के लिए आसान शिकार बन सकता है. ऐसे फोन में मौजूद निजी जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है जिसका इस्तेमाल ठगी, ब्लैकमेलिंग या बड़े फ्रॉड के लिए किया जा सकता है.
स्मार्टफोन कंपनियां आमतौर पर सीमित समय तक ही सिक्योरिटी अपडेट देती हैं. ज्यादातर ब्रांड्स चार से पांच साल तक अपडेट सपोर्ट प्रदान करते हैं, जिसके बाद फोन को बदलना ही सुरक्षित विकल्प रह जाता है. हालांकि, अब कुछ प्रीमियम कंपनियां जैसे Samsung और Google अपने नए फ्लैगशिप फोन में सात साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही हैं. इसके उलट, मिड-रेंज और बजट स्मार्टफोन में यह सपोर्ट आमतौर पर तीन से चार साल तक ही सीमित रहता है.
ऐसे में अगर आप अपने डेटा और प्राइवेसी को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो पुराने फोन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना या जरूरत पड़ने पर नया स्मार्टफोन लेना ही इस बढ़ते साइबर खतरे से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका है.