वेबसाइट की कुकीज को बिना Accept या Reject किए ही कर देते हैं बंद? जानिए ये चालाकी आपको कितनी महंगी पड़ सकती है
डिजिटल प्राइवेसी से जुड़ी रिपोर्ट्स बताती हैं कि बड़ी संख्या में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को यह ठीक से पता ही नहीं होता कि कुकीज आखिर होती क्या हैं और इनके बारे में निर्णय लेना क्यों जरूरी है. इसी अनजानपन की वजह से लोग बिना सोचे-समझे पॉप-अप को हटा देते हैं.
असल में कुकीज छोटी टेक्स्ट फाइलें होती हैं जो वेबसाइट आपके ब्राउजर में सेव करती है. इनमें आपकी ब्राउज़िंग से जुड़ी जानकारी जैसे आपने कौन-से पेज देखे, क्या सर्च किया और कौन-सी भाषा या सेटिंग चुनी, जैसी डिटेल्स शामिल हो सकती हैं. कुछ कुकीज वेबसाइट के अपने काम के लिए होती हैं जबकि कुछ बाहरी कंपनियों से जुड़ी होती हैं जो आपके व्यवहार के आधार पर विज्ञापन या सुझाव दिखाती हैं.
अगर आप कुकीज के बारे में कोई विकल्प चुने बिना पॉप-अप बंद कर देते हैं तो अलग-अलग वेबसाइट अलग तरह से व्यवहार कर सकती हैं. कुछ साइटें सीमित एक्सेस देती हैं, जिससे उनके सभी फीचर सही ढंग से काम नहीं करते. कहीं-कहीं लॉगिन, शॉपिंग कार्ट या पर्सनलाइज्ड कंटेंट जैसी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं. वहीं कुछ वेबसाइटें आपको अंदर आने ही नहीं देतीं जब तक आप कोई निर्णय न लें.
यह भी समझना जरूरी है कि हर कुकी हानिकारक नहीं होती. अधिकतर कुकीज सिर्फ अनुभव को बेहतर बनाने के लिए बनाई जाती हैं. लेकिन अगर आप किसी संदिग्ध वेबसाइट पर हैं या असुरक्षित पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जोखिम बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में आपकी सेव की गई जानकारी गलत हाथों में जा सकती है.
सबसे समझदारी भरा तरीका यह है कि केवल भरोसेमंद वेबसाइटों पर ही आवश्यक कुकीज को स्वीकार करें और जहां जरूरत न हो वहां अतिरिक्त ट्रैकिंग की अनुमति न दें. बिना सोचे पॉप-अप बंद कर देना आसान जरूर है लेकिन बेहतर यह है कि एक पल रुककर समझें कि आप किस बात की अनुमति दे रहे हैं. आपकी छोटी-सी सावधानी आपकी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बना सकती है.