तितली के पंखों से बढ़ेगी सोलर पैनल की एफिशिएंसी? नया डिजाइन करेगा कमाल

सोलर पैनल की एफिशिएंसी को बढ़ाने की कोशिशें लगातार जारी है. अभी यह आंकड़ा 20-25 प्रतिशत के बीच अटका हुआ है. यानी सोलर पैनल पर जितनी सनलाइट गिरती है, उसमें से केवल 20-25 प्रतिशत को ही बिजली में कन्वर्ट किया जा सकता है. अब सोलर पैनल का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एफिशिएंसी बढ़ाने पर रिसर्च तेज हो गई है. अब इस काम के लिए वैज्ञानिक तितली के पंखों से प्रेरणा ले रहे हैं.
दरअसल, काली तितली के पंख अपने ऊपर गिरने वाली 99.94% लाइट को एब्जॉर्ब कर लेते हैं और इसी कारण इनका रंग काला दिखता है. ये पंख छोटे-छोटे स्केल्स से बने होते हैं और ये अपने ऊपर पड़ने वाली लाइट को रिफ्लेक्ट होने की बजाय कैप्चर कर लेते हैं. यह एक स्पॉन्जी और छोटे-छोटे सुराखों वाला सरफेस होता है. अब वैज्ञानिक इन पंखों जैसी बनावट वाले पैनल्स को टेस्ट कर रहे हैं और उन्हें शुरुआती सफलता मिलती हुई नजर आ रही है.
एक स्टडी के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशन से नौ अलग-अलग ब्लैक बटरफ्लाई के पंखों जैसी बनावट वाले सोलर सेल तैयार किया. इसका मकसद सोलर सेल से लाइट के रिफ्लेक्शन को कम करना और ज्यादा रोशनी को सोखना था. स्टडी में पाया गया कि इस डिजाइन से रोशनी का रिफ्लेक्शन 35 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गया और एनर्जी आउटपुट भी बढ़कर 66 प्रतिशत के करीब चला गया.
इस एक्सपेरिमेंट से यह पता चला है कि लाइट रिफ्लेक्शन को कम कर सोलर पैनल की आउटपुट को बढ़ाया जा सकता है. इसके लि पैनल की बनावट में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे. हाल ही में एक और स्टडी में वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों के छत्ते की तरह स्ट्रक्चर वाले नए सोलर पैनल तैयार किए थे, जो फ्लैट डिजाइन वाले पैनल की तुलना में ज्यादा सनलाइट कैप्चर कर सकते हैं.
वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों से इंस्पिरेशन लेते हुए एक 3D कॉन्केव सोलर पैनल बनाया है, जिसकी स्ट्रक्चर एक हनीकॉम्ब जैसी है. इसका फायदा यह होगा कि पैनल पर आने वाली लाइट सरफेस पर पड़ते ही रिफ्लेक्ट होने की बजाय पैनल की एंगल्ड वॉल्स के बीच ही बाउंस होती रहेगी. जब यह एक वॉल से टकराकर दूसरी पर आएगी तो उसे भी इसे सनलाइट से इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करने का मौका मिलेगा.
सोलर पैनल की एफिशिएंसी को लेकर यह सवाल अकसर पूछा जाता है कि क्या ये कभी 100 प्रतिशत एफिशिएंट हो पाएंगे. अब नए डिजाइन ने एफिशिएंसी को 66 प्रतिशत तक लेकर जाने की उम्मीद जगाई है, लेकिन 100 प्रतिशत एफिशिएंसी अचीव होना लगभग असंभव है. सोलर पैनल का एंगल और छाया के कारण इस बात पर असर पड़ता है कि कितनी सनलाइट पैनल तक पहुंचेगी. इसके अलावा धूल-मिट्टी भी सनलाइट पैनल तक पहुंचने से रोक सकती है.
ज्यादा टेंपरेचर से भी सोलर पैनल की एनर्जी आउटपुट पर असर पड़ता है. जैसे-जैसे तापमान 25 डिग्री से ज्यादा होता जाता है, वैसे-वैसे पैनल का एनर्जी प्रोडक्शन कम होता जाता है. 25 डिग्री के ऊपर हर डिग्री के साथ-साथ इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन 0.3-0.5 प्रतिशत कम होता रहता है. सोलर पैनल के सामने यह एक बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के लिए अब नई टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है.
सारी टेक्नोलॉजिकल एडवांस्मेंट के बावजूद सोलर पैनल फुल एफिशिएंसी के पास नहीं पहुंच सकते. साइंस भी कहती है कि जब लाइट को इलेक्ट्रिसिटी में बदला जाता है तो कुछ एनर्जी लॉस्ट होती है. यहां पर थर्मोडायनामिक्स का पहला नियम भी लागू होता है, जो कहता है कि एनर्जी को न तो क्रिएट किया जा सकता है और न ही डिस्ट्रॉय. यह केवल अपना रूप बदलती है. इस मामले में यह बिजली न बनकर हीट बन जाएगी.