अमेरिका ने इस घातक हथियार से ईरान पर किया हमला! जानें किस तकनीक पर करता है काम
इस पूरे घटनाक्रम में जिस हथियार की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है GBU-57, जिसे ‘मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ कहा जाता है. यह अमेरिका के सबसे घातक और भारी बमों में से एक है जिसे विशेष रूप से गहराई में बने ठिकानों को तबाह करने के लिए तैयार किया गया है. इसे B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स से छोड़ा जाता है जो मिसौरी के व्हाइटमैन एयरबेस से उड़ान भरते हैं.
GBU-57 को खासतौर पर अंडरग्राउंड बंकरों और सुरंगों को ध्वस्त करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका वजन करीब 13,600 किलोग्राम होता है और यह 61 मीटर जमीन के नीचे घुसकर धमाका करने में सक्षम है. इसकी सतह इतनी मजबूत होती है कि जमीन में तेज़ी से घुसने पर भी यह टूटता नहीं.
इस बम को गिराने की प्रक्रिया बेहद सटीक होती है सैटेलाइट नेविगेशन से लक्ष्य तय किया जाता है और बम को ऊंचाई से गिराकर गहराई तक पहुंचाया जाता है. बम में मौजूद डिले फ्यूज़ तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि विस्फोट तय गहराई पर ही हो. अकसर हमले में एक से ज्यादा बम गिराए जाते हैं, पहला रास्ता साफ करने के लिए और बाकी पूर्ण विनाश के लिए.
रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हमले में B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल हुआ है. पहले ये खबरें भी आई थीं कि अमेरिका ने इन बॉम्बर्स को गुआम भेजा है. माना जा रहा है कि GBU-57 जैसे हथियारों का इस्तेमाल ईरान के फोर्दो जैसे पर्वतीय अंडरग्राउंड ठिकानों पर किया गया होगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर दावा किया कि सभी मिशन सफल रहे और उनके सभी विमान सुरक्षित लौट आए. उन्होंने अमेरिकी सेनाओं को बधाई देते हुए कहा, “अब शांति का समय है.”
ईरान की ओर से कहा गया कि अमेरिकी हमलों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है क्योंकि सभी संवेदनशील परमाणु सामग्री को पहले ही वहां से हटा लिया गया था. सरकारी टेलीविज़न चैनल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फोर्दो जैसे क्षेत्रों में भले ही बम गिरे हों, लेकिन उनसे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ.
BBC के रिपोर्टर मार्क लोवेन के अनुसार, यह घटना अमेरिका, ईरान और इसराइल के रिश्तों में एक बड़े मोड़ का संकेत देती है. अमेरिका के मध्य पूर्व में 40,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं जो अब उच्च अलर्ट पर हैं. साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर हमला जारी रहा, तो वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएंगे.