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AI ने कर दिखाया कमाल! अब सोलर पावर को मिलेगा बड़ा फायदा

हिमांशु तिवारी   |  05 Aug 2026 06:34 PM (IST)
AI ने कर दिखाया कमाल! अब सोलर पावर को मिलेगा बड़ा फायदा

दुनियाभर में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. घरों की छतों से लेकर बड़े-बड़े सोलर पार्क तक, हर जगह सोलर पैनलों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन सोलर एनर्जी की सबसे बड़ी कमी ये है कि ये पूरी तरह से मौसम पर निर्भर रहता है. अगर मौसम खराब है तो कम सोलर एनर्जी पैदा होती है. ऐसे में बिजली कंपनियों के लिए पहले से ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि अगले दिन सोलर प्लांट कितनी बिजली पैदा करेंगे.

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इसी चुनौती का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक नई टेक्नोलॉजी तैयार की है जो सोलर पावर प्रोडक्टिविटी का अनुमान पहले के मुकाबले 13 प्रतिशत तक ज्यादा सटीक तरीके से लगा सकती है.

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आपको बता दें कि बिजली ग्रिड को लगातार बैलेंस रखना पड़ता है. अगर बिजली की डिमांड ज्यादा हो और प्रोडक्टिविटी कम हो जाए तो बिजली कटौती की नौबत आ सकती है. वहीं जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर भी ग्रिड को संभालना मुश्किल हो सकता है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोलर एनर्जी की प्रोडक्टिविटी सूरज की रोशनी पर निर्भर करती है, इसलिए बिजली कंपनियां पहले से अनुमान लगाती हैं कि अगले दिन कितनी बिजली उपलब्ध होगी. जितना सटीक ये अनुमान होगा, उतनी ही बेहतर तरीके से बिजली की डिमांड और सप्लाई में बैलेंस बनाया जा सकेगा.

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इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने सोलर पावर का अनुमान लगाने के लिए कई अलग-अलग मॉडल तैयार किए. कुछ मॉडल पुराने तरीकों पर बेस्ड थे जो पुराने आंकड़ों में पैटर्न पहचानने में सक्षम हैं.

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दूसरी ओर, कुछ मॉडल आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क यानी AI टेक्नोलॉजी पर बेस्ड थे. ये सिस्टम मौसम में होने वाले मुश्किल बदलावों और समय के साथ बनने वाले संबंधों को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. इसी वजह से AI बेस्ड मॉडल लगातार बदलती परिस्थितियों में ज्यादा अच्छे से काम करने में सक्षम होते हैं.

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शोधकर्ताओं ने 2019 से 2022 के बीच इकट्ठा किए गए मौसम और सोलर पावर प्रोडक्टिविटी के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है. टेस्ट के दौरान अलग-अलग मॉडल की ताकत को असली कंडिशन में परखा गया जिससे ये समझा जा सके कि कौन-सा तरीका सबसे बेहतर रिजल्ट देता है. इस डिटेल्ड रिजल्ट से ये साफ हुआ कि किसी एक मॉडल पर पूरी तरह निर्भर रहना हमेशा सही नहीं होता है.

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रिसर्च का सबसे जरूरी परिणाम ये रहा कि कोई भी एक मॉडल हर जगह और हर परिस्थिति में सबसे अच्छा परफॉर्मेंस नहीं कर पाया. हालांकि BiLSTM नाम का AI मॉडल बाकी सभी से काफी बेहतर तरीके से काम करने में सक्षम रहा है. लेकिन वैज्ञानिकों ने पाया कि जब कई मॉडलों के रिजल्ट्स को एक साथ जोड़ा गया तो रिजल्ट और भी बेहतर मिले.

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इसके लिए दो अलग-अलग तरीके अपनाए गए. पहला तरीका वेटेड एवरेजिंग था जिसमें पहले अच्छा परफॉर्मेंस करने वाले मॉडलों को ज्यादा महत्व दिया गया. दूसरा तरीका मल्टी-इनपुट था जिसमें अलग-अलग जगहों से मिलने वाले मौसम से संबंधित जानकारी को एक साथ इस्तेमाल किया गया.

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