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Varanasi History: वाराणसी, काशी या फिर बनारस...तीन नामों वाले शहर की क्या है कहानी ?

ABP Live   |  28 May 2022 12:10 PM (IST)
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Varanasi History: भगवान शिव की नगरी, अध्यात्म का शहर, धार्मिक राजधानी, इतिहास की झलक वाला शहर और गंगा किनारे बसी पुरातन संस्कृति की कहानी वाला शहर...यूपी के वाराणसी को और ना जाने क्या-क्या नाम दिए गए हैं. लेकिन दुनिया के प्राचीनतम और सबसे पवित्र शहरों में शुमार वाराणसी के दो और नाम भी प्रचलित हैं. वाराणसी को काशी और बनारस भी कहा जाता है, लेकिन क्यों...यही आज आपको बताने की कोशिश करेंगे.

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पहले बात बनारस की - लोगों के मन में सवाल उठता रहता है कि आखिर क्यों वाराणसी को बनारस कहा जाता है. दरअसल लोगों में वाराणसी से ज्यादा बनारस लोकप्रिय है.

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हालांकि आधिकारिक तौर पर बनारस ज्यादा जगहों पर दर्ज नहीं है लेकिन दुनियाभर में मशहूर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी इस नाम पर मुहर लगाने के लिए काफी है. वहीं अब सरकार ने यहां मौजूद मड़ुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस कर दिया है.

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इतिहास के पन्ने खंगाले तो मुगलकाल और अंग्रेजी शासन के दौरान इस शहर का आधिकारिक नाम बनारस ही था.

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शिव शंभू की नगरी काशी, बाबा भोले का धाम काशी, रौशनी का शहर काशी, बाबा विश्वनाथ का धाम काशी, मां गंगा के आशीर्वाद से हमेशा फलता-फूलता रहा ये शहर इतिहास के पन्नों में काशी के नाम से दर्ज है.

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इतिहासकारों की मानें तो वाराणसी का सबसे प्राचीन नाम काशी है. इस शहर को करीब तीन हजार साल से इस नाम से पुकारा जाता है. माना जाता है कि प्राचीनकाल में हुए एक राजा काशा के नाम पर शहर का नाम काशी पड़ा.

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वहीं एक मत ये भी है कि काशी को कई बार काशिका से भी संबोधित किया जाता है. कशिका का मतलब होता है चमकता हुआ.

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भगवान शिव की नगरी हमेशा चमकती रही जिसे कशाते यानि रौशनी का शहर कहा जाता था. जिससे इसका नाम भी काशी हो गया.

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