कानपुर हेड पोस्ट ऑफिस के चीफ पोस्टमास्टर को कर्मचारियों ने बनाया बंधक, फिर काटा जमकर हंगामा
कानपुर में बने हेड पोस्ट ऑफिस में अचानक उस वक्त हड़कंप मच गया जब पोस्ट ऑफिस के सैकड़ों कर्मचारियों ने हंगामा काटते हुए पोस्ट ऑफिस के हेड पोस्ट मास्टर को उन्हीं के कार्यालय में बंधक बना दिया और जोरदार हंगामा भी किया.
हेड पोस्ट ऑफिस में सबसे बड़े अधिकारी को कर्म जातियों ने उनके दुर्व्यवहार के चलते बंधक बना दिया साथ ही नारेबाजी के साथ काम पूरी तरह से बाधित कर दिया. पोस्ट ऑफिस यूनियन के कर्मचारियों ने नेताओं के साथ मिलकर अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
भारतीय डाक सेवा देश की सबसे बड़ी सेवाओं में एक है. एक शहर से दूसरे शहर में लोगों के संदेशों के पहुंचने के लिए ये बहुत पुरानी सेवा है लेकिन कानपुर के बड़े चौराहे पर बने हेड पोस्ट ऑफिस में कार्यरत कर्मचारियों ने अपने अधिकारी के खराब व्यवहार और उनके साथ किए जा रहे अमानवीय व्यवहार को लेकर एक जुट हो गए और इसी के चलते सभी कर्मचारियों ने पोस्ट ऑफिस का कामकाज बंद कर विरोध शुरू कर दिया इस विरोध में कर्मचारी इस कदर हावी हुए कि उन्होंने अपने बड़े अधिकारी को उनके ही कक्ष में बंद कर बंधक बना लिया और सभी कर्मचारियों से माफी मांगने की मांग करने लगे.
पोस्ट ऑफिस में काम कारण वाले सभी कर्मचारियों ने इसलिए विरोध किया क्योंकि अधिकारी उनके साथ गलत व्यवहार करते हैं. उनकी समस्याओं को नहीं समझते उनकी मांग को पूरा नहीं करते उन्हें हीनभावना से देखते हैं. जिसके चलते वो लगातार उनको प्रताड़ित करते हैं. कभी कर्मचारियों के दूसरे पोस्ट ऑफिस स्थानांतरण करते हैं. कभी उनकी छुट्टी को लेकर उनका वेतन काट दिया करते हैं. गलत शब्दों का प्रयोग कर उन्हें बुलाया जाता है. लंबे समय से चल रही इस प्रताड़न के चलते आज कर्मचारियों ने अधिकारी के व्यवहार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
वहीं पोस्ट ऑफिस के हेड पोस्टमास्टर देवदास ने बताया कि उन्हें बंधक उन्हीं के घर में बना लिया गया क्योंकि वो अपने इस डाकघर को अपना घर मानते हैं. हेड पोस्टमास्टर साहब ने बताया कि हमने सिर्फ इतना कहा था कि अगर आप कार्यालय आ रहे हैं तो आपको कम करना पडेगा, ओर रोजाना कार्यालय आना भी पड़ेगा अगर वो आकर काम नहीं करेंगे तो उन्हें सैलरी जनता के पैसों से दी जाती है और जनता का काम बाधित नहीं होना चाहिए.
फिलहाल हंगामे के बाद कर्मचारियों ने अधिकारी के कमरे को खोला और उन्हें बंधक मुक्त किया जिसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच एक सुगम बात हुई. कर्मचारी और अधिकारियों के बीच सामंजस्य बन गया और मामले को तूल न देते हुए कर्मचारी काम पर वापस आने को तैयार हो गए. हालांकि इस मामले में अधिकारियों की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं की गई. हंगामे की सूचना आर भारी पुलिस बल भी पोस्ट ऑफिस पहुंच गया था.