JNU की संपत्तियों को बेचने पर विरोध जारी, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र संघ के अध्यक्ष
गोमती गेस्ट हाउस के निजीकरण को लेकर जेएनयू छात्र संघ की भूख हड़ताल आज 8वें दिन भी जारी रही. छात्रों का कहना है कि केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन, विश्वविद्यालय की संपत्तियों को टुकड़ों में बेचने की नीयत से गोमती गेस्ट हाउस का निजीकरण करने की तैयारी में हैं, जब तक इस निर्णय को खारिज नहीं कर दिया जाता तब तक वो अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे.
जेएनयू छात्र संघ ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार कॉर्पोरेट घरानों को लाखों-करोड़ों की सब्सिडी देकर उच्च शिक्षा के लिए फंड क्यों कम कर रही है. केंद्र सरकार ने अडानी और अंबानी जैसे अमीर कॉर्पोरेट घरानों को 5.98 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी दी है.
छात्रों ने ये भी कहा कि ये रकम कितनी महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये रकम देश में अगले 12 सालों के लिए उच्च शिक्षा बजट की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा की राशि मे कटौती करते हुए कॉर्पोरेट घरानों को सब्सिडी दी, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से दूर हो जाएंगे.
जेएनयू प्रशासन खुद को कैम्पस चलाने में असमर्थ बताते हुए पैसों के लिए गोमती गेस्ट हाउस को बेचने की योजना बना रहा है. कुलपति ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उनका प्रशासन परिसर को चलाने के लिए ये योजना बना रहा है.
मौजूदा गोमती गेस्ट हाउस परिसर की उस इमारत में स्थित है, जहां विश्विद्यालय ने इंडियन स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के साथ अपना संचालन शुरू किया था. विजिटिंग प्रोफेसरों और प्रतिनिधियों को इसी हेरिटेज बिल्डिंग में ठहराया जाता है.
छात्र संघ का आरोप है कि ये उसी पुराने निजीकरण गेम प्लान का हिस्सा है, जहां सरकारें एक बार में नहीं बल्कि टुकड़ों में संपत्तियों को बेचती हैं. वहीं, भविष्य में व्यवसायिक उद्देश्यों के लिए जेएनयू के अन्य हिस्सों को किराए पर भी दिए जाने की संभावना बन सकती है.
छात्र संघ ने छात्रों से अपील करते हैं कि वो गोमती गेस्ट हाउस के निजीकरण के खिलाफ खड़े हों और धन की कमी के इस घिसे-पिटे बहाने को खारिज करें. उनका कहना है कि सरकार धन्नासेठों को लाखों करोड़ रुपये की सब्सिडी दे सकती है तो उन्हें उच्च शिक्षा के लिए फंड कम करने का कोई अधिकार नहीं है.