Bastar News: विदेशी पर्यटकों को लुभा रही बस्तर की खूबसूरत झोपड़ियां, जानिए क्या है यहां के होमस्टे की खासियत
छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थानीय प्रशासन के द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई होमस्टे की सुविधा विदेशी पर्यटकों को काफी लुभा रही है. बड़ी संख्या में विदेशों से पर्यटक बस्तर के ग्रामीण अंचलों में बनाए गए होमस्टे में मेहमान बनकर यहां के आदिवासियों के बीच रहकर इनके जीवन शैली को बहुत करीब से देख और समझ रहे हैं.
इसके साथ-साथ बस्तर के स्वादिस्ट व्यंजन और आदिवासी परंपरा और वेशभूषा का लुत्फ उठा रहे हैं. दरअसल जिला प्रशासन ने बस्तर जिले के कुछ ग्रामीण अंचलों में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल सके इसके लिए ग्रामीणों के घरों में होमस्टे की शुरुआत की है.
इस होमस्टे कॉन्सेप्ट को अच्छा रिस्पांस भी मिल रहा है.
बड़ी संख्या में पूरे देश से बस्तर घूमने आने वाले पर्यटकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी इस होमस्टे का लुत्फ उठा रहे हैं.
बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने बताया कि खूबसूरत वाटरफॉल्स और चारों ओर वनों से घिरे बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं. उनमें से ही एक है होमस्टे. इस होमस्टे की शुरुआत अब बस्तर के कई ग्रामीण अंचलों में शुरू की गई है.
जिले के दरभा, कोटमसर, तीरथगढ़, छोटे कवाली, चिलकुटी, गुड़ियापदर पुष्पाल, मांझीपाल और अब नेशनल पार्क में भी होमस्टे की शुरुआत की गई है. जहां होमस्टे संचालित कर रहे ग्रामीण विदेशी पर्यटकों को अपने घर में मेहमान बनाकर रख रहे हैं.
इन्हें आदिवासी परंपरा, बस्तर के रीति रिवाज, संस्कृति समझाने के साथ-साथ आदिवासियों के द्वारा बनाये जाने वाले स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद चखाया जा है. बकायदा अब बस्तर में खासकर विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं.
साथ ही इन झोपड़ियों में रुक कर आदिवासी कला और संस्कृति को जानने और समझने की कोशिश कर रहे हैं. आदिवासियों के बीच रहकर इनकी जीवन शैली को भी बहुत करीब से देख रहे हैं.
गांवों के घने जंगलों के बीच होमस्टे के लिए बने झोपड़िया पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं. देश और विदेशों के पर्यटक इन होमस्टे में अपना भरपूर समय बिता रहे हैं.
बस्तर जिले के नानगुर गांव में साल 2008 से ही होमस्टे का संचालन कर रहे शकील रिजवी ने बताया कि उनके यहां हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. उनकी ग्रामीण अंचलों में रुकने की ज्यादा डिमांड रहती है.
ऐसे में वे बकायदा उनकी झोपड़ी में रहते है. यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, कला, नृत्य और आदिवासियों के जीवन शैली को करीब से जानने और समझने की कोशिश करते है. इन पर्यटको के लिए रुकने की पूरी सुविधा और बस्तर के स्वादिष्ट व्यंजन की व्यवस्था की जाती है.
उन्होंने बताया कि खासकर विदेशों से इटली, फ्रांस, रूस, जर्मनी, और USA से भी कई विदेशी पर्यटक यहां आते हैं. इसके अलावा रिसर्चर, फोटोग्राफर, फॉरेस्टर और विदेशी शेफ भी बस्तर पहुंचते हैं.
ये लोग बस्तर की कल्चर, खान-पान, रहन-सहन और रीति-रिवाज को जानने के लिए बस्तर के आदिवासियों के बीच रहकर समझने की कोशिश करते हैं. इसके अलावा भारत देश के कोने-कोने से भी कई पर्यटक होमस्टे में रहकर बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और बस्तर के रीति रिवाज और व्यंजन का लुत्फ उठाते हैं. देश दुनिया से बस्तर घूमने वाले पर्यटकों के लिए ग्रामीण होमस्टे पहली पसंद बनी हुई है.
इसके अलावा शकील रिजवी ने बताया कि केवल बस्तर जिले में ही नहीं बल्कि संभाग के कोंडागांव, नारायणपुर, केशकाल कांकेर, दंतेवाड़ा और सुकमा में भी अब ग्रामीण अंचलों में होमस्टे संचालित की जा रही है. जहां देशी और विदेशी पर्यटक होमस्टे की सुविधा का पूरा लाभ उठा रहे हैं.
ये लोग यहां रहकर आदिवासी परंपरा और उनके रीति रिवाज को समझ रहे हैं. इससे होमस्टे संचालित कर रहे ग्रामीणों को भी काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. साथ ही ग्रामीणों को इससे रोजगार प्राप्त होने के साथ आय भी हो रही है.