In Pics: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों की दुनिया में है धमक, आप भी करें इन खूबसूरत मंदिरों में दर्शन
Chhattisgarh: भारत अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर दुनियाभर में जाना जाता है. देश के अंदर ना सिर्फ ऐतिहासिक स्थलों की बड़ी संख्या है बल्कि आज भी ये पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते हैं. अलग-अलग राज्यों में अपनी-अपनी पारंपरिक महत्वता है और अपने-अपने ऐतिहासिक स्थल हैं. आज बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ की. इस राज्य में पर्यटकों की संख्या ना सिर्फ बढ़ रही है बल्कि ये अब विदेशी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. आज आपको बताते हैं छत्तीसगढ़ की कुछ ऐसी जगहों के बारे में जहां आपको एक पर्यटक के तौर पर जरूर जाना चाहिए.
दंतेश्वरी मंदिर - ये मंदिर बस्तर जिले के दंतेवाड़ा इलाके में मौजूद है. दंतेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना 14वीं शताब्दी में की गई थी. ये मंदिर माता के 52 शक्तिपीठों में से एक है और हर साल अपनी मनोकामना लेकर हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां देवी सती का दांत गिरा था इसी वजह से इसे दंतेश्वरी मां का मंदिर कहा जाता है.
बम्बलेश्वरी मंदिर - ये मंदिर भी राजनांदगांव जिले में मौजूद है. डोगरगढ़ इलाके में सबसे ऊंची पहाड़ी पर स्थित बम्बलेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पूरी एक हजार सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. करीब 2000 वर्ष पहले इसे स्थानीय राजा वीरसन ने तैयार कराया था.
बर्फानी धाम - राज्य के राजनंदगांव जिले में मौजूद बर्फानी धाम भगवान भोलेनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यहां भगवान शिव और नंदी की विशाल प्रतिमाएं मौजूद हैं. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. शैव संप्रदाय के लोगों के बीच ये एक तीर्थस्थल के तौर पर प्रचलित है. इस मंदिर को इसकी बेहद सुंदर वास्तुकला और भव्यता के लिए पहचाना जाता है.
भोरमदेव - भोरमदेव मंदिर ना सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि भारत के सबसे प्राचीन मंदिर में से एक है. नागारा शैली की वास्तुकला से तैयार इस मंदिर को 11वीं शताब्दी में बनाया गया था. कबीरधाम जिले में मौजूद ये मंदिर भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. इस मंदिर की नक्काशी और मूर्तिकला खजुराहो मंदिरों जैसी ही है.