Anant Singh News: ...तो क्या लिपि सिंह पर भारी पड़ गए अनंत सिंह? पुलिस ने पेश किए 13 गवाह तो 'छोटे सरकार' ने 34
बिहार के मोकामा क्षेत्र के पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह को बुधवार (14 अगस्त) को पटना हाई कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए एके-47 मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
इस फैसले के बाद अनंत सिंह के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. पटना हाईकोर्ट ने लदमा स्थित उनके घर में मिले एके-47, कारतूस और 2 ग्रेनेड मिलने के मामले में रिहा किया है.
अनंत सिंह पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला चल रहा था, जिसमें पटना की एक अदालत ने उन्हें 10 साल जेल की सजा सुनाई थी.
'छोटे सरकार' के रूप में चर्चित अनंत सिंह मोकामा से विधायक रहे हैं, लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें विधायकी गंवानी पड़ी थी. अनंत सिंह 25 अगस्त 2019 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं.
इस पूरे मामले की जांच बाढ़ अनुमंडल की तत्कालीन एएसपी लिपि सिंह ने की थी. उन्होंने 5 नवंबर 2019 को कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी. बता दें कि लिपि सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी हैं.
बताया जाता है कि इस मामले में पुलिस की ओर से 13 गवाहों को पेश किया गया, जबकि अनंत सिंह की ओर से 34 गवाह पेश किए गए. इस मामले को विशेष श्रेणी में रखा गया और स्पीडी ट्रायल किया गया.
पटना उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अनंत सिंह के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है. लोकसभा चुनाव के पहले सिंह को पैरोल दी गई थी.
अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा में उस समय 11 घंटे तक छापेमारी की गई थी. इस दौरान उनके आवास से हैंड ग्रेनेड एके-47 और जिंदा कारतूस मिला था.
हथियार मिलने के बाद बाढ़ प्रशासन ने पटना पुलिस के साथ मिलकर राजधानी के माल रोड स्थित सरकारी आवास गिरफ्तार करने पहुंची थी, लेकिन वह नहीं मिले थे. इसके बाद अनंत सिंह फरार घोषित हो गए.
7 दिनों तक फरार चल रहे अनंत सिंह ने दो वीडियो जारी किया था. कहा था कि वह भागे नहीं हैं. जल्द सामने आएंगे. उन्हें फंसाया जा रहा है.
फरार हुए अनंत सिंह ने 24 अगस्त 2019 को दिल्ली के साकेत कोर्ट में सरेंडर किया था. इसके बाद उन्हें पटना लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
3 साल तक जेल में बंद रहे अनंत सिंह को उस वक्त झटका लगा था जब पटना के एमपी एमएलए कोर्ट ने 14 जून 2022 को उन्हें दोषी करार दिया था. 10 साल की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई थी. सदस्यता जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी को आरजेडी ने मोकामा से टिकट दिया और उपचुनाव में वह जीत गईं.