बारिश में मिला खून और खून की नदियों में तब्दील हो गईं बांग्लादेश की गलियां!

देश और दुनिया में हर साल की तरह इस साल भी ईद-अल-अधा धूम-धाम से मनाया गया. लेकिन बीते कुछ समय से इस त्यौहार में दी जाने वाली बली को लेकर एक बहस ने ज़ोर पकड़ा है. सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या कुर्बानी के नाम पर जनवरों का खून ऐसे बहाना जायज है.
शहर में 1000 से ज़्यादा कुर्बानी की जगहें होने के बावजूद लोगों ने अपनी सुविधा की वजह से जानवरों की कुर्बानी शहर की उन गलियों में दी जहां वे रहते हैं. इसकी वजह से देखते ही देखते सड़कों पर काफी खून जमा हो गया और मंज़र ऐसा हो गया कि अच्छे-अच्छे सकते में आ गए.
देश और दुनिया में हर साल की तरह इस साल भी ईद-अल-अधा धूम-धाम से मनाया गया. लेकिन बीते कुछ समय से इस त्यौहार में दी जाने वाली बली को लेकर एक बहस ने ज़ोर पकड़ा है. सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या कुर्बानी के नाम पर जनवरों का खून ऐसे बहाना जायज है.
बारिश की वजह से शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और जलभारव में कुर्बान हुए पशुओं के खून के रंग ने मिलकर और भयावह कर दिया. देश के अन्य शहरों ने इन तस्वीरों की कड़ी आलोचना की. लोगों ने इसे नगर निगम की विफलता से जोड़कर देखा.
त्यौहार के दौरान ढाका में रुक-रुककर बारिश भी हो रही थी. बारिश ने त्यौहार के रंग में भंग डालते हुए इस दौरान कुर्बान हुए बकरों के खून से शहर की कई गलियों को ऐसा लाल कर दिया कि देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं.
भारत में सोशल मीडिया पर इसे लेकर बीते मंगलवार को भारी बहस हुई और मिट्टी का बकरा जैसे ट्रेंड्स लगातार टॉप पर बने रहे. अब बात करते हैं इन तस्वीरों की जो पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजधानी ढाका के लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं.