बॉलीवुड रिपोर्ट कार्ड: जानें पिछले 7 महीनों में कैसा रहा बड़ी फिल्मों का हाल!
इस साल की फिल्मों के बारे में बात की जाए तो हिट और फ्लॉप मूवीज़ का आंकड़ा बराबर का है. जहां एक तरफ कुछ फिल्मों ने दर्शकों का दिल जीत लिया, वहीं कुछ ऐसी भी फिल्में थी जिन्हें देखकर आपको बॉलीवुड के गिरते स्तर का भी पता चला. नीरजा और एयरलिफ़्ट के साथ ही हमें वीरप्पन और अज़हर जैसी फिल्मों को भी झेलना पड़ा. जहां एक तरफ अलीगढ़ और वेटिंग जैसी फ़िल्मे थीं, जिन्हें क्रिटिक्स ने सराहा, तो वहीं मस्तीज़ादे और ग्रेट ग्रैंडमस्ती जैसी सेक्स्चुअल कॉमेडी फिल्मों ने दर्शकों को निराश किया. आगे की स्लाइड्स में देखें इस साल की अबतक की फ्लॉप और हिट फिल्मों की लिस्ट!
अज़हर, सरबजीत और वीरप्पन बायोपिक फिल्में बनाने के चक्कर में कहीं फिल्म का कबाड़ा तो नहीं हो गया? अज़हर, सरबजीत और वीरप्पन जैसी फिल्में इस बात को सच में बदल देती हैं.
मस्तीज़ादे, क्या कूल हैं हम और ग्रेट ग्रैंड मस्ती तुषार कपूर और पलहाज निहलानी की ये अश्लील सेक्स कॉमेडी फिल्में बॉलीवुड के प्रति सिर्फ़ निराशा ही लाती हैं.
Teraa Surroor:आख़िर हिमेश रेशमिया फिल्में करते ही क्यों है? उनका ये एक्टिंग का बुखार कब उतरेगा?
सरबजीत और जज़्बा जैसी मूवीज़ को देख कर लगता है कि वो पहले वाली ऐश्वर्या राय कहां चली गयी? जज़्बा में सिर्फ़ ऐश्वर्या की तेज़ आवाज़ ही सुनाई दे रही है पर उनकी एक्टिंग नही दिखती.
कपूर एंड सॅन्स बेहद खूबसूरती से फैमिली से जुड़े हिस्सों को छूती है. मेलोड्रामा पर निर्धारित यह फिल्म आपके दिल को छू जाती है.
'ड्रग एडिक्शन' पर बनी फिल्म 'उड़ता पंजाब' अपनी रिलीज़ को लेकर काफ़ी दिनों तक चर्चा में थी. फिल्म में पंजाब में फैले हुए ड्रग एडिक्नश को बखूबी दर्शाया गया है. शाहिद कपूर और करीना कपूर ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है. इस फिल्म के साथ ही दिलजीत डोसांझ ने बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बना ली.
निर्देशक पवन कृपलानी की फिल्म 'फोबिया' बॉलीवुड का 'डर के आगे जीत वाला' अनुभव था. कृपलानी की इंडियन साइकोलॉजिकल फिल्म 'फोबिया' देख कर डर से आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं, और यह ही इस फिल्म की जीत है. 'फोबिया' में घिसे- पिटे डराने के अंदाज़ को ना अपनाते हुए बहुत ही खूबी से फिल्म को 'हॉरर' बनाया गया है
बॉलीवुड सेन्सिटिव और परिपक्व भी हो सकता है, फिल्म 'अलीगढ़' इसका उदाहरण है. 'क्या कूल हैं हम' और 'मस्तीज़ादे' जैसी फिल्में देखने के बाद 'अलीगढ़' देखना परमानंद का अनुभव था. प्रो सिरास की कहानी सिर्फ़ गे राइट्स की लड़ाई के बारे में नहीं है, बल्कि यह कहानी है ना हार मानने की.
नीरजा भनोत की लाइफ हिस्ट्री पर बनी इस फिल्म में सोनम कपूर ने अपनी 'फैशनिस्टा' वाली इमेज के विपरीत जाकर एक सीरीयस किरदार बखूबी निभाया. फिल्म में सोनम ने 23 साल की निडर लड़की के किरदार में खुद को बखूबी ढाला है. नीरजा बॉक्स ऑफिस पर एक कामयाब फिल्म साबित हुई.