मुझे सिर्फ ब्रा में शर्म आती है और इसलिए मैं टॉप पहनना पसंद करती हूं: प्रियंका
शर्म को ऐसी चीज़ नहीं है जो सेंसर बोर्ड किसी सीन को काटकर लोगों को नहीं सिखा सकता है. जिसे शर्मिले स्वाभाव या सेंसर बोर्ड की परिभाषा के हिसाब से संस्कारी होना होगा उसे किसी सीन के होने या नहीं होने से बहुत फर्क नहीं पड़ेगा.
सिनेमा से लेकर टॉप के ब्यूटी कॉम्पटीशंस का हिस्सा रह चुंकी प्रियंका से सेंसर बोर्ड को सीख लेनी चाहिए.
इसपर प्रियंका ने जवाब दिया कि वे ऐसा नहीं करती हैं. उन्हें ब्रा में शर्म आती है. वे शर्ट या टॉप डालकर निकलना पसंद करती हैं.
प्रियंका से जब पूछा गया कि क्या कभी उन्होंने सिर्फ ब्रा को अपने टॉप के तौर पर इस्तेमाल किया है.
अब प्रियंका ने अपने पहनावे को लेकर कुछ बातें साफ की हैं.
ऐसे में हम जिन अदाकाराओं को बहुत बोल्ड मानते हैं वे असल ज़िंदगी में काफी शर्मिली होती हैं. अभी हाल ही में नरगिस फाखरी ने बोला था कि उन्हें छोटे कपड़ों में शर्म आती है.
आखिर यूट्यूब और टोरेंट के ज़माने में जब सबकुछ इतना खुलेआम हो रहा है तब ऐसे सीन्स को हटाने का क्या मतलब रह जाता है. समय के साथ भारत का सिनेमा और समाज काफी बदला है इनका प्रभाव एक दूसरे पर रहा है.
ऐसे में बहस तेज हो गई कि क्या कपड़ों तक से बॉलीवुड का संस्कार तय होगा?
आए दिन फिल्मों के सीन्स को काटते रहने वाले सेंसर बोर्ड ने फिल्म बार बार देखो से ब्रा का सीन गायब कर दिया. इसे लेकर खूब हो हल्ला मचा और सेंसर बोर्ड के नए नाम संस्कारी बोर्ड को और प्रमाणिकता मिली.