ओलंपिक स्पेशल: तो इसलिए रंग-विरंगे टेप्स इस्तेमाल करते हैं एथलीट्स!

आपने अक्सर एथलीट्स के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर रंग-बिरंगे टेप्स चिपके देखे होंगे. एथलीट्स की बॉडी पर ये टेप्स कभी कंधों पर तो कभी टखनों पर चिपके नज़र आते हैं और वे इन टेप्स को बड़ी ही बेतरतीबी से शरीर पर चिपकाये खेल के मैदान में दिखते हैं. जब आप इनको टेप्स चिपकाए देखते होंगे तो आपके मन में सवाल उठता होगा ही कि ये टेप्स तो बिलकुल भी फैशनेबल नहीं लग रहे हैं फिर क्यों ये खिलाड़ी इन्हें चिपकाए मैदान में खेल रहे हैं. आइए हम आपकों बताते हैं इन टेप्स का राज-
इन टेप्स को ये लोग 24 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं. इनकी मदद से मसल्स के दर्द और जलन कम होती है और थके हुई मसल्स को आराम भी मिलता है. अब भारतीय रेसलर योगेश्वर दत्त और जुडोका अवतार सिंह जैसे कई और भारतीय रेसलर इन टेप्स की मदद लेने लगे हैं.
आपने अक्सर एथलीट्स के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर रंग-बिरंगे टेप्स चिपके देखे होंगे. एथलीट्स की बॉडी पर ये टेप्स कभी कंधों पर तो कभी टखनों पर चिपके नज़र आते हैं और वे इन टेप्स को बड़ी ही बेतरतीबी से शरीर पर चिपकाये खेल के मैदान में दिखते हैं. जब आप इनको टेप्स चिपकाए देखते होंगे तो आपके मन में सवाल उठता होगा ही कि ये टेप्स तो बिलकुल भी फैशनेबल नहीं लग रहे हैं फिर क्यों ये खिलाड़ी इन्हें चिपकाए मैदान में खेल रहे हैं. आइए हम आपकों बताते हैं इन टेप्स का राज-
आपको बता दे कि बिलकुल साधारण से दिखने वाले इन टेप्स को काइनेसियॉलजी टेप कहते हैं. इनका यूज स्ट्रेस्ड मसल्स को आराम देने के लिए किया जाता है. दरअसल फिजियोथेरपिस्ट एक स्ट्रेस्ड मसल (ऐसे मसल्स जिनमें तनाव-दर्द हो रहा हो) के शुरूआती और अंत के हिस्सों को पहचानकर उनको काइनेसियो टेप की मदद से जोड़ देता है.
इस टेप से शरीर की त्वाच में खिचाव रुकने के साथ-साथ उस मसल का मूवमेंट काफी हद तक काबू में आ जाता है, जिससे बॉडी को काफी राहत मिलती है. यही वजह है कि एथलीट्स इन टेप्स का यूज कर अपनी रोज की ट्रेनिंग रूटीन ज्यादा आराम से पूरी कर पाते हैं.