उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के बगैर अधूरा है हिन्दी साहित्य का सफर!

मुंशी प्रेमचंद के 136वें जन्मदिन पर गूगल ने उन्हें डूडल बनाकर याद किया है. हिन्दुस्तानी के जाने-माने लेखक मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास स्थित लमही गांव में हुआ था. प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था. कलम के जादूगर के नाम से मशहूर इस लेखक की हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा पर समान पकड़ थी. बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रेमचंद ने हिंदी से पहले उर्दू में लिखना शुरु किया था. आगे की स्लाइड्स में जानिए प्रेमचंद की उन रचनाओं के बारे में जिन्होंने उन्हें अमर बना दिया.
मुंशी प्रेमचंद के 136वें जन्मदिन पर गूगल ने उन्हें डूडल बनाकर याद किया है. हिन्दुस्तानी के जाने-माने लेखक मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास स्थित लमही गांव में हुआ था. प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय था. कलम के जादूगर के नाम से मशहूर इस लेखक की हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा पर समान पकड़ थी. बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रेमचंद ने हिंदी से पहले उर्दू में लिखना शुरु किया था. आगे की स्लाइड्स में जानिए प्रेमचंद की उन रचनाओं के बारे में जिन्होंने उन्हें अमर बना दिया.
'ईदगाह' कहानी दिल को छू लेने वाली एक बेहद ही खूबसूरत कहानी है. इस कहानी में हामिद ईद के दिन तीन पैसों से कुछ खाने और खरीदने की बजाए अपनी दादी के लिए चिमटा खरीद कर लाता है.
'दो बैलों की कथा' प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियों में से एक है. प्रेमचंद की यह कहानी हीरा और मोती नाम के दो बैलों के इर्द-गिर्द घूमती है.
प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में 'ठाकुर' का कुआं' भी शामिल है. इस कहानी के माध्यम से प्रेमचंद ने वर्ण व्यवस्था और भारत में हजारों सालों से चली आ रही जाति व्यवस्था को निशाना बनाया है.
'सेवासदन' एक नारी के वेश्या बनने की कहानी है. इस उपन्यास के जरिए प्रेमचंद ने महिला जीवन से जुड़ी समस्याओं पर प्रकाश डाला है.
'कफ़न' प्रेमचंद की सबसे लोकप्रिय कहानियों में से एक है. इस कहानी में सांसारिक मोहमाया और जीवन की मार्मिकता का सजीव चित्रण किया गया है.
प्रेमचंद का पहला कहानी संग्रह 'सोज़े वतन' नाम से 1908 प्रकाशित हुआ. सोज़े वतन का अर्थ है देश का मातम. इस संग्रह में पांच कहानियां थीं. दुनिया का सबसे अनमोल रतन, शेख मखमूर, यही मेरा वतन है, शोक का पुरस्कार और सांसारिक प्रेम. पांचों कहानियां उर्दू भाषा में थीं. हमीरपुर के जिला कलेक्टर ने इस कहानी संग्रह को देशद्रोही करार दे दिया था और इसकी सारी प्रतियां जलवाकर नष्ट करा दी थीं.
'गोदान' प्रेमचन्द का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है. कुछ लोग इसे उनकी सर्वोत्तम कृति भी मानते हैं. इस उपन्यास का प्रकाशन 1936 में हिन्दी ग्रन्थ रत्नाकर कार्यालय, बम्बई से हुआ था. गोदान में भारतीय ग्राम समाज एवं परिवेश का सजीव चित्रण है. 'गोदान' ग्राम्य जीवन और कृषि संस्कृति का महाकाव्य है. इसमें प्रगतिवाद, गांधीवाद और मार्क्सवाद का पूर्ण चित्रण किया गया है.