तमिलनाडु का रहस्यमय अनुष्ठान ‘कोलम’ क्या आप जानते हैं इसका मतलब? देखें फोटो
कोलम तमिलनाडु की धर्म और सौंदर्य की जीवंत कला है. जिन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं हैं, उनके लिए ये रोजमर्रा का डिजाइन हो सकता है, जो सजावट के लिए काम आता है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है.
तमिलनाडु के ज्यादातर घरों में महिलाएं हर सुबह चावल के आटे से कोलम बनाती हैं. यह किसी सजावट या स्टाइल के लिए नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कीड़ों को खिलाने, सकारात्मक ऊर्जा लाने और प्राकृति का सम्मान करने के लिए ऐसा किया जाता है.
तमिलनाडु में ये कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि हजारों सालों से इस पवित्र रस्म को निभाया जा रहा है, जो अंहिसा, अनुशासन और ब्रह्मांडीय सद्भाव का प्रतीक है. कोलम समृद्धि, धर्म और विज्ञान का जीता जागता उदाहरण हैं.
कोलम की ही तरह अन्य राज्यों में भी इसी से मिलती जुलती कला है, जैसे- मुग्गुलु आंध्र प्रदेश में, रंगोली महाराष्ट्र में, अल्पना बंगाल और झोटी चिता ओडिशा में प्रसिद्ध है.
किंतु तमिलनाडु में ही कोलम को चावल के आटे से बनाया जाता है, वो भी प्रतिदिन जिसमें आध्यात्मिकता के साथ पारिस्थितिकी और ज्यामिति का मिश्रण देखने को मिलता है.