Dhanteras 2025: दिवाली के पहले धनतेरस क्यों, जानें पौराणिक महत्व को
पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. इसलिए इस दिन को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है. धनतेरस का संबंध समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से है.
भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा और आयुर्वेद का देवता माना जाता है. उन्हें विष्णु का अंशावतार भी कहा जाता है. मान्यता है कि उन्होंने ही चिकित्सा विज्ञान के प्रचार और प्रसार के लिए अवतार लिया.
भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा और आयुर्वेद का देवता माना जाता है. उन्हें विष्णु का अंशावतार भी कहा जाता है. मान्यता है कि उन्होंने ही चिकित्सा विज्ञान के प्रचार और प्रसार के लिए अवतार लिया.
धनतेरस से ही दिवाली का पांच दिवसीय उत्सव शुरू होता है. इस दिन लोग नए बर्तन, सोना, चांदी और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदते हैं, जिससे घर में खुशहाली और समृद्धि आती है.
धनतेरस विशेष रूप से उत्तरी और पश्चिमी भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह केवल सोना खरीदने या लक्ष्मी पूजा करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई व्यापारिक समुदायों के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का दिन है. कई लोग इस दिन नए उद्यम भी शुरू करते हैं या बड़ी खरीदारी करते हैं.
धनतेरस का त्योहार भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इसी दिन धन और संपत्ति के देवता भगवान कुबेर की पूजा इसी दिन की जाती है. ऐसा करने से माना जाता है कि घर में धन और संपत्ति का आगमन होता है.