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Vastu Purush: कैसे हुआ वास्तु पुरुष का जन्म? जानिए इससे जुड़ी पौराणकि कहानी
Vastu Purush: वास्तु पुरुष भवन के प्रमुख देवता हैं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह एक विशालकाय प्राणी है जो भूमि पर अधोमुख लेटा हुआ है. ऐसे में आइए जानें कि वास्तु पुरुष का जन्म कैसे हुआ था.
वास्तु पुरुष का जन्म कैसे हुआ?
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वास्तु पुरुष भवन के देवता हैं, जिनका जन्म भगवान शिव के पसीने से हुआ था. वास्तु शास्त्र के अनुसार, वह जमीन पर अधोमुख (मुंह जमीन की ओर) लेटे हुए हैं, जिनका सिर उत्तर-पूर्व और पैर दक्षिण-पश्चिम दिशा में है. वास्तु पुरुष की पूजा और वास्तु नियमों का पालन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है.
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पौराणिक कथाओं के अनुसार, वास्तु पुरुष का जन्म भगवान शिव और अंधकासुर के बीच हुए युद्ध के दौरान हुआ था. युद्ध के दौरान भगवान शिव के पसीने की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं, जिससे एक विशालकाय प्राणी का जन्म हुआ. जिसे वास्तु पुरुष के नाम से जाना जाता है.
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यह प्राणी इतना विशाल था कि यह पूरी दुनिया को खाने लगा, जिससे सभी देवता भयभीत हो गए और ब्रह्मा के पास गए. ब्रह्मा ने देवताओं के साथ मिलकर उसे पृथ्वी पर इस तरह दबा दिया कि उसका सिर उत्तर-पूर्व की ओर और पैर दक्षिण-पश्चिम की ओर हो गए.
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वास्तु पुरुष ने ब्रह्मा जी से पूछा कि उसकी क्या गलती है, क्योंकि वह तो केवल भूख मिटा रहा था. तब ब्रह्मा जी ने उसे यह वरदान दिया कि कोई भी नया निर्माण तुम्हारा भोजन होगा, और जो लोग तुम्हारी पूजा करेंगे और वास्तु नियमों का पालन करेंगे, तो तुम और तुम्हारे साथ के 44 देवता उन घरों की रक्षा करोगे.
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ब्रह्मा जी ने उस प्राणी को वरदान दिया कि वह संसार के कल्याण के लिए भूमि पर निवास करेगा और सभी देवी-देवता भी उसके शरीर पर निवास करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वास्तु की पूजा नहीं करेंगे, उन्हें कई कष्ट होंगे.
Published at : 16 Nov 2025 03:40 PM (IST)
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