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प्राचीन भारत में कुत्तों के प्यार और सम्मान की कहानी! ऋग्वेद से लेकर महाभारत तक छोड़ी अपनी छाप
Dogs in ancient India: कुत्तों से प्यार और सम्मान करने का सिलसिला कोई आधुनिक कल्चर नहीं, बल्कि प्राचीन भारत का हिस्सा रहा है. महाभारत से लेकर धार्मिक पुराणों तक कुत्तों की भूमिका का जिक्र मिलता है.
प्राचीन भारत में कुत्तों की भूमिका
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भारत में कुत्तों के प्रति प्रेम (Dog Lover) की सोच और सम्मान की भावना को आज की बात नहीं है. इसकी जड़ें काफी गहरी और प्राचीन हैं. पुराने समय में कुत्तों के मात्र पालतू जानवर के रूप में नहीं, बल्कि धर्म, सुरक्षा और प्रतीकात्मक के रूप में देखते थे. यह पंरपरा हजारों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है.
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सबसे प्राचीन वेदों में से एक, ऋग्वेद करीब 3500 वर्ष पुराना ग्रंथ जिसमें कुत्तों की भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है. इसमें इंद्र की दिव्य कुतिया सरमा का उल्लेख मिलता है, जिसे सभी कुत्तों की दिव्य पूर्वज माना गया है. कुत्तों को वैदिक युगों में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दर्जा प्राप्त था.
Published at : 07 Dec 2025 05:31 PM (IST)
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