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Long Term Relationship Tips: लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप खत्म करना क्यों बन जाता है सबसे मुश्किल फैसला? जानें वजह

एबीपी लाइव   |  18 Apr 2026 06:01 PM (IST)
Long Term Relationship Tips: लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप खत्म करना क्यों बन जाता है सबसे मुश्किल फैसला? जानें वजह

लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप को खत्म करना सबसे मुश्किल होता है क्योंकि इसमें हमारे इमोशन, आदतें और अपनी पहचान भी उससे जुड़ जाती है. दिमाग को तो समझ आ जाता है कि रिश्ता सही नहीं चल रहा, लेकिन दिल और शरीर उस जुड़ाव को छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते हैं. सालों तक साथ रहने से हम अपने पार्टनर के इतने हैबिचुअल हो जाते हैं कि अकेलापन, डर और दुख का एहसास बहुत गहरा लगता है. इसी वजह से लोग महीनों या सालों तक ऐसे रिश्ते में बने रहते हैं, जो उन्हें मानसिक रूप से थका रहा होता है. ऐसे में एक थेरेपिस्ट के अनुसार, इसके पीछे सिर्फ इमोशनल ही नहीं बल्कि मनोविज्ञान और शरीर के अंदर चल रही बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं भी जिम्मेदार होती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप खत्म करना इतना मुश्किल क्यों हो जाता है.

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जब कोई रिश्ता लंबे समय तक चलता है, तो धीरे-धीरे हम अपनी पहचान का एक हिस्सा अपने पार्टनर के साथ जोड़ लेते हैं. हम, मैं और वो से बदलकर हम बन जाते हैं. ऐसे में रिश्ता खत्म करना सिर्फ एक इंसान को खोना नहीं होता, बल्कि ऐसा लगता है जैसे हम अपने ही पर्सनेलिटी का एक हिस्सा खो रहे हैं. यही वजह है कि यह फैसला बहुत भारी लगने लगता है.

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हर रिश्ता हमेशा एक जैसा नहीं होता है. कभी बहुत प्यार मिलता है, कभी झगड़े होते हैं, और कभी सब ठीक लगता है. यह उतार-चढ़ाव दिमाग को एक तरह से उम्मीद में फंसा देता है कि शायद अगली बार सब अच्छा हो जाएगा. यह ठीक उसी तरह काम करता है जैसे जुआ खेलने की लत, जहां इंसान बार-बार जीत की उम्मीद में खेलता रहता है.

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वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब हम किसी करीबी इंसान से अलग होने के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग के वही हिस्से एक्टिव होते हैं जो शारीरिक दर्द के समय होते हैं यानी दिमाग सच में इस स्थिति को खतरा मानता है. इसलिए ब्रेकअप का विचार भी शरीर में डर और दर्द जैसी प्रतिक्रिया पैदा करता है.

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लंबे रिश्तों में शरीर लगातार कुछ ऐसे हार्मोन बनाता है जो प्यार और जुड़ाव बढ़ाते हैं, जैसे ऑक्सीटोसिन. यह हार्मोन हमें पार्टनर के करीब रखता है और इमोशनल अटैचमेंट बढ़ाता है. जब रिश्ता टूटने लगता है, तो अकेलापन और बेचैनी बहुत तेज महसूस होती है.

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कई बार हम असल दर्द से ज्यादा उस दर्द की कल्पना से डर जाते हैं जो आगे चलकर होगा. मन में यह डर होता है कि ब्रेकअप के बाद अकेलापन, दुख और पछतावा बहुत ज्यादा होगा. हालांकि रिसर्च कहती है कि समय के साथ यह दर्द कम हो जाता है, लेकिन उस वक्त यह डर इतना असली लगता है कि इंसान फैसला नहीं ले पाता है.

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