नौकरी और बच्चों के बीच फंसे पेरेंट्स, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

आज के समय में काम और परिवार के बीच बैलेंस बनाना लाखों पेरेंट्स के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है. एक तरफ नौकरी की जिम्मेदारियां हैं तो दूसरी तरफ बच्चों की परवरिश और परिवार की जरूरतें. तकनीक और वर्क फ्रॉम होम जैसी सुविधाओं से उम्मीद थी कि लोगों की लाइफ आसान होगी, लेकिन हालिया सर्वे कुछ और ही कहानी बता रहा है.अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर के किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में वर्किंग पेरेंट्स महसूस करते हैं कि नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों को एक साथ संभालना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. सर्वे में 2,242 वर्किंग पेरेंट्स को शामिल किया गया था. रिपोर्ट बताती है कि कई पेरेंट्स हर दिन नौकरी और बच्चों के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश में मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं.
सर्वे के अनुसार, 70 प्रतिशत फुल टाइम काम करने वाले पेरेंट्स ने कहा कि वे नौकरी के दौरान भी बच्चों से जुड़े काम करते हैं. वहीं 59 प्रतिशत लोगों ने बताया कि बच्चों के साथ समय बिताते हुए भी उन्हें नौकरी से जुड़े काम करने पड़ते हैं. आज मोबाइल फोन, ईमेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की वजह से काम किसी एक जगह तक सीमित नहीं रह गया है. ऑफिस का काम घर तक पहुंच रहा है और घर की जिम्मेदारियां ऑफिस तक ऐसे में पेरेंट्स लगातार दो अलग अलग जिम्मेदारियों के बीच फंसे रहते हैं.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परिवार की कई जिम्मेदारियां ऐसी होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं, लेकिन उन्हें संभालने में काफी मेंटल एनर्जी लगती है. जैसे बच्चों की स्कूल एक्टिविटी पर नजर रखना, डॉक्टर की अपॉइंटमेंट तय करना, जरूरी डॉक्यूमेंट याद रखना या घर की जरूरतों का ध्यान रखना. सर्वे के अनुसार 62 प्रतिशत वर्किंग मदर्स ने कहा कि नौकरी और परिवार के बीच बैलेंस बनाना मुश्किल है. वहीं 47 प्रतिशत पिता ही ऐसा महसूस करते हैं. इससे साफ है कि महिलाओं पर मानसिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ ज्यादा है.
सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत पेरेंट्स का कहना है कि उनकी नौकरी उन्हें अच्छा अभिभावक बनने में मुश्किल पैदा करती है. वहीं 45 प्रतिशत लोगों ने माना कि बच्चों की जिम्मेदारी उनके करियर में आगे बढ़ने की राह को प्रभावित करती है. कई पेरेंट्स ने एक्सेप्ट किया कि वे अपने बच्चों के साथ उतना समय नहीं बिता पा रहे हैं जितना वे चाहते हैं. लगभग 60 प्रतिशत पेरेंट्स ने कहा कि उनके पास बच्चों के लिए पूरा समय नहीं है. कई लोग स्कूल कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताओं और अन्य जरूरी मौकों में शामिल नहीं हो पाते क्योंकि उन्हें काम की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि डबल इनकम वाले परिवारों में भी घरेलू जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा महिलाओं के पास ही रहता है. ऐसे परिवारों में जहां माता और पिता दोनों फुल टाइम नौकरी करते हैं, वहां 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बच्चों से जुड़ी ज्यादा जिम्मेदारियां मां निभाती हैं. सिर्फ 10 प्रतिशत मामलों में पिता ज्यादा जिम्मेदारियां संभालते हैं. घर के कामों को लेकर भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली. कई मदर्स का मानना है कि घरेलू जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा संभालती हैं, जबकि कई पिता इन जिम्मेदारियों को बराबर बंटा हुआ मानते हैं.
सर्वे में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में वर्किंग पेरेंट्स के पास अपनी सेहत, आराम, दोस्तों और पर्सनल चीजों के लिए समय नहीं है. विशेष रूप से माताओं ने बताया कि उन्हें एक्सरसाइज करने और आराम करने का समय नहीं मिल पाता. कई लोगों के लिए शौक, सामाजिक संबंध और पर्सनल लाइफ धीरे धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि लगातार बढ़ता तनाव और थकान लंबे समय में परिवार और पर्सनल लाइफ दोनों को प्रभावित कर सकती है.
सर्वे के अनुसार ज्यादातर वर्किंग पेरेंट्स मानते हैं कि जरूरत पड़ने पर घर से काम करने की सुविधा उनके लिए मददगार है. इससे बच्चों के कार्यक्रमों में शामिल हो पाते हैं और परिवार के करीब रह सकते हैं. हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि घर से काम करने वाले पेरेंट्स भी नौकरी और परिवार के बीच संतुलन को आसान नहीं मानते. घर में मौजूद रहने का मतलब यह नहीं है कि काम का दबाव कम हो जाता है. नौकरी की समय सीमा, मीटिंग्स और प्रदर्शन से जुड़ी अपेक्षाएं पहले की तरह बनी रहती हैं.