Leg Day Importance: जिम में लेग डे छोड़ना पड़ सकता है भारी, फिटनेस एक्सपर्ट ने बताया- शरीर पर क्या पड़ता है असर?

जिम जाने वाले लोगों के बीच अक्सर एक बात कही जाती है. लेग डे कभी स्किप नहीं करना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद कई लोग अपर बॉडी की एक्सरसाइज पर ज्यादा ध्यान देते हैं और पैरों की कसरत को नजरअंदाज कर देते हैं. फिटनेस एक्सपर्ट के अनुसार यह आदत लंबे समय में शरीर के संतुलन और परफॉर्मेंस पर बुरा असर डाल सकती है. दरअसल लेग डे वर्कआउट न सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, बल्कि पूरे शरीर के लिए एक मजबूत आधार पर तैयार करता है.
फिटनेस एक्सपर्ट्स बताते हैं कि पैरों की मांसपेशियां शरीर की सबसे बड़ी मसल ग्रुप होती है. इसमें ग्लूट्स, क्वाड्स और हैमस्ट्रिंग्स शामिल है. रोजमर्रा की एक्टिविटी से लेकर खेलकूद हर काम में अहम भूमिका निभाते हैं. स्क्वाट, डेडलिफ्ट और लंज जैसी एक्सरसाइज न केवल ताकत बढ़ाती है. बल्कि शरीर का संतुलन और तीव्रता भी बेहतर होती है.
लेग वर्कआउट करने से शरीर की जड़ यानी लोअर बॉडी मजबूत होती है. जिससे ऊपरी शरीर की मूवमेंट भी बेहतर होती है. अगर सिर्फ अपर बॉडी पर ध्यान दिया जाए तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और बॉडी का शेप असंतुलित दिखने लगता है.
वहीं पैरों की एक्सरसाइज करने से शरीर में कई जरूरी हार्मोन रिलीज होते हैं. जैसे टेस्टोस्टेरोन और ह्यूमन ग्रोथ यह हार्मोन मसल्स ग्रोथ, फैट, मेटाबॉलिज्म और रिकवरी में मदद करते हैं. इसके अलावा लेग वर्कआउट से एथलेटिक परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है और शरीर की ताकत में इजाफा होता है.
एक्सपर्ट के अनुसार जब आप एक पैर से एक्सरसाइज करते हैं तो कोर मसल्स भी एक्टिव होते हैं. इससे शरीर का बैलेंस बेहतर होता है और चोट लगने का खतरा कम हो जाता है. साथ ही मसल इम्बैलेंस को भी ठीक करने में मदद करता है, जिससे दोनों पैरों की ताकत बराबर बनी रहती है.
अगर आप नियमित रूप से लेग वर्कआउट नहीं करते तो शरीर की नींव कमजोर हो जाती है. इससे मूवमेंट, स्टेबिलिटी और कोआर्डिनेशन पर असर पड़ता है. समय के साथ मसल्स का आकार कम हो सकता है और शरीर में फैट बढ़ने लगता है, जिससे फिटनेस लेवल गिर सकता है
सिर्फ ऊपरी शरीर पर ध्यान देने से बॉडी का शेप असंतुलित हो जाती है और चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके अलावा जोड़ों में दर्द और कमर दर्द जैसी समस्याएं भी आ सकती है.
फिटनेस एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि हर दिन लेग डे करना जरूरी नहीं है. अगर मांसपेशियों में ज्यादा दर्द हो, चोट लगी हो या तबीयत खराब हो तो आराम करना बेहतर होता है. बुखार, ज्यादा थकान, सीने में जकड़न या तेज खांसी जैसे लक्षण होने पर वर्कआउट पूरी तरह छोड़ देना चाहिए.