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Kidney Function Tests: ये 4 आसान टेस्ट करा लिए तो दिक्कत बढ़ने से पहले पता लग जाएगी किडनी की बीमारी, डॉक्टर भी बताते हैं जरूरी

सोनम   |  04 Dec 2025 03:09 PM (IST)
Kidney Function Tests: ये 4 आसान टेस्ट करा लिए तो दिक्कत बढ़ने से पहले पता लग जाएगी किडनी की बीमारी, डॉक्टर भी बताते हैं जरूरी

किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और अब मौत के नौवें सबसे बड़े कारण बन चुकी हैं. डॉक्टर सभरवाल बताते हैं कि eGFR, सिस्टाटिन C, यूरिन डिपस्टिक और प्रोटीन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो जैसे टेस्ट शुरुआती पहचान के लिए बेहद जरूरी हैं. किसी भी रिपोर्ट में गड़बड़ी दिखे तो तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए.

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द लैंसेट की एक रिपोर्ट में बताया गया कि 1990 में जहां 7.8 करोड़ लोग किडनी रोग से प्रभावित थे, 2023 में यह संख्या 78.8 करोड़ तक पहुंच गई. इतनी तेज़ बढ़ोतरी दिखाती है कि किडनी रोग अब वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं. इसलिए किडनी की सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो गई है.

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डॉ. सभरवाल ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि किडनी की बीमारी अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ती रहती है, इसलिए साधारण टेस्ट करवाना जरूरी है. कई लोग तब जांच कराते हैं जब समस्या बढ़ चुकी होती है. नियमित जांच बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ सकती है.

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क्रिएटिनिन और eGFR किडनी की फिल्टरिंग क्षमता समझने के आसान और भरोसेमंद तरीके माने जाते हैं. डॉक्टर के अनुसार सिर्फ क्रिएटिनिन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, eGFR असली तस्वीर दिखाता है. इससे पता चलता है कि किडनी कितने प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही है.

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सिस्टाटिन C एक ऐसा प्रोटीन है जिसका स्तर किडनी की हालत को सही ढंग से बताता है. मांसपेशियां ज्यादा होने या सप्लीमेंट लेने वालों में क्रिएटिनिन सही अंदाजा नहीं देता, ऐसे में सिस्टाटिन C ज्यादा सटीक होता है. इसके बढ़ने का मतलब है कि किडनी पर असर शुरू हो चुका है.

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यूरिन डिपस्टिक और UPCR ऐसे टेस्ट हैं जो शुरुआती प्रोटीन लीकेज पकड़ लेते हैं. किडनी पर तनाव होने पर सबसे पहले यूरिन में प्रोटीन बढ़ता है, जिसे डिपस्टिक तुरंत दिखा देता है. UPCR यह बताता है कि प्रोटीन कितनी मात्रा में लीक हो रहा है और क्या यह सामान्य से ज्यादा है.

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अगर रिपोर्ट में प्रोटीन अधिक हो, क्रिएटिनिन बढ़ रहा हो या यूरिन में खून मिले, तो तुरंत एक्सपर्ट से मिलना चाहिए. डॉक्टर साफ कहते हैं कि ऐसे मामलों में घरेलू नुस्खे, डिटॉक्स या हल्दी वाला दूध किसी काम के नहीं आते. समय पर पहचान और वैज्ञानिक इलाज ही किडनी को बचा सकता है.

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