Cancer: क्या आप भी हर रोज़ पीते हैं शराब, तो ज़रा संभल जाइए, आपके इर्द गिर्द मंडरा रहा है इन 6 तरह के कैंसर का खतरा
मुंह का कैंसर: कैंसर जो मुंह के किसी भी हिस्से में होता है, जिसमें होंठ, जीभ, मसूड़ों और मुंह के तालू शामिल हैं. शराब मुंह में कोशिकाओं के लिए एक उत्तेजक के रूप में काम करती है, जिससे वे कैंसर पैदा करने वाले कारकों को बढ़ा सकती है.
गले का कैंसर (थ्रोट कैंसर): शराब गले में जलन और सूजन पैदा कर सकती है, जिससे गले के किसी भी हिस्से में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इस कैंसर को ग्रसनी कैंसर भी कहा जाता है.
ग्रासनली का कैंसर: कैंसर जो फूड पाइप में होता है और जो खाने को गले से पेट तक ले जाती है, उसे ग्रासनली का कैंसर कहते हैं. ये ज्यादा शराब का सेवन, खासकर धूम्रपान के साथ करने से स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है.
लीवर कैंसर: कैंसर जो लीवर कोशिकाओं में शुरू होता है, लीवर कैंसर कहलाता है. लगातार शराब के सेवन से लीवर सिरोसिस हो सकता है, जिसके कारण लीवर कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है.
ब्रेस्ट कैंसर: कैंसर जो ब्रेस्ट की कोशिकाओं में बनता है, सबसे अधिक महिलाओं को प्रभावित करता है. शराब के सेवन से हार्मोन-रिसेप्टर-पॉजिटिव ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, यहां तक कि शराब के कम सेवन को भी महिलाओं में स्तन कैंसर के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है.
कोलन और रेक्टल कैंसर: कैंसर जो कोलन या मलाशय या पाचन तंत्र के कुछ हिस्सों में होता है, उसे कोलन और रेक्टल कैंसर कहते हैं. शराब मलाशय में कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है और ये जोखिम उन लोगों में अधिक है जो ज्यादा शराब का सेवन करते हैं.