क्या वजन घटाने में बेअसर है इंटरमिटेंट फास्टिंग? स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
इंटरमिटेंट फास्टिंग का मतलब है खाने और उपवास के समय को तय कर लेना. इसमें लोग रोज या सप्ताह के कुछ दिनों में सीमित समय के लिए ही खाना खाते हैं. इसके कुछ सामान्य तरीके हैं. जिसमें 5:2 डाइट यानी सप्ताह में 5 दिन सामान्य खाना और 2 दिन बहुत कम कैलोरी लेना. रोजाना 8 घंटे के अंदर ही खाना खाना और बाकी 16 घंटे फास्ट रखना. एक दिन सामान्य खाना और अगले दिन बहुत कम खाना (बारी-बारी से), लोग मानते हैं कि इससे वजन जल्दी कम होता है और मेटाबॉलिज्म तेज होता है.
शोधकर्ताओं ने लगभग 2,000 वयस्कों पर किए गए 22 अलग-अलग अध्ययनों का विश्लेषण किया. इन अध्ययनों में 12 महीने तक इंटरमिटेंट फास्टिंग का प्रभाव देखा गया. सामान्य डाइट सलाह (जैसे कम कैलोरी लेना और संतुलित भोजन) या बिल्कुल कोई सलाह न देना की तुलना की गई. रिज्लट यह निकला कि वजन घटाने में इंटरमिटेंट फास्टिंग और सामान्य डाइट सलाह के बीच बहुत कम या कोई खास अंतर नहीं था. लाइफ की क्वालिटी में भी कोई बड़ा सुधार नहीं दिखा.
इस समीक्षा के प्रमुख लेखक लुइस गैरेग्नानी (ब्यूनस आयर्स के इतालवी अस्पताल) ने कहा कि सोशल मीडिया पर इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर जो उत्साह दिखाया जा रहा है, वह वैज्ञानिक प्रमाणों से मेल नहीं खाता, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के डॉ. बैपटिस्ट ल्यूरेंट का कहना है कि यह एक और उदाहरण है जहां जनता की धारणा और वैज्ञानिक सच्चाई अलग-अलग हैं. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कीथ फ्रेयन के अनुसार, वजन कम करने के लिए कोई जादुई तरीका नहीं है. असली समाधान कैलोरी कम करना ही है.
हालांकि वजन घटाने में खास फर्क नहीं दिखा, लेकिन कुछ मामलों में यह देखा गया कि कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है, ब्लड शुगर बेहतर हो सकती है या आंतों के स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है, लेकिन इन लाभों की पुष्टि के लिए और अधिक मजबूत और बड़े शोध की जरूरत है.
जिन अध्ययनों का विश्लेषण किया गया, उनमें प्रतिभागियों की संख्या कम थी, सभी में मजबूत वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल नहीं हुआ था, पुरुषों और महिलाओं पर अलग-अलग प्रभाव की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, अलग-अलग देशों और अलग BMI वाले लोगों पर प्रभाव का अंतर भी साफ नहीं था.इसलिए शोधकर्ता अपने रिजल्ट को लेकर मोडेरेटर कॉन्फिडेंट हैं, पूरी तरह नहीं.
आजकल कई लोग वजन घटाने के लिए वेगोवी (Wegovy) और मौनजारो (Mounjaro) जैसे इंजेक्शन का यूज कर रहे हैं. माना जाता है कि ब्रिटेन में लगभग 16 लाख लोग इनका यूज कर रहे हैं, लेकिन एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि जब लोग ये इंजेक्शन बंद कर देते हैं, तो उनका वजन तेजी से वापस बढ़ जाता है. पारंपरिक डाइट और व्यायाम छोड़ने वालों की तुलना में चार गुना ज्यादा तेजी से,इससे यह साफ होता है कि वजन कम करने का स्थायी तरीका लाइफस्टाइल में बदलाव ही है.