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(Source: ECI/ABP News)

डिहाइड्रेशन से सिकुड़ सकता है दिमाग, जानें पानी की कमी से दिमाग-शरीर को कितना होता है नुकसान?

एबीपी लाइव   |  04 Jan 2026 07:26 AM (IST)
डिहाइड्रेशन से सिकुड़ सकता है दिमाग, जानें पानी की कमी से दिमाग-शरीर को कितना होता है नुकसान?

हम लोग अक्सर यही सोचते हैं कि डिहाइड्रेशन से शरीर में बस थोड़ी पानी की कमी होती है और इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से शरीर को कई तरह की गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. अगर शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है, तो इसका सबसे गहरा असर हमारे मस्तिष्क यानी दिमाग पर पड़ता है. डिहाइड्रेशन की स्थिति में दिमाग सिकुड़ सकता है, क्योंकि शरीर दिमाग में मौजूद पानी को खींचना शुरू कर देता है. इससे दिमाग के टिश्यू यानी ऊतक सिकुड़ने लगते हैं.

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जब हम पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते और शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ जाता है, तो खून में नमक और अन्य तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है. इससे खून गाढ़ा हो जाता है. खून को पतला करने के लिए शरीर दिमाग की कोशिकाओं से पानी खींचना शुरू कर देता है. जैसे ही कोशिकाओं से पानी निकलता है, दिमाग का आकार सिकुड़ने लगता है.

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वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो किसी भी काम को करने के लिए दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो यह दिमाग के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है.

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शरीर में पानी की कमी का सबसे खतरनाक असर बच्चों और किशोरों के दिमाग पर पड़ता है. डिहाइड्रेशन से उनके दिमाग के फ्रंटल रीजन में असामान्य गतिविधि बढ़ जाती है. इसका सीधा असर उनकी एकाग्रता, समस्या सुलझाने की क्षमता और योजना बनाने की क्षमता पर पड़ता है.

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अगर शरीर में सिर्फ 1 या 2 प्रतिशत पानी की कमी हो जाए, तो यह मानव मस्तिष्क को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है. इसमें ध्यान की कमी और याददाश्त कमजोर होना जैसे लक्षण शामिल हैं.

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शरीर में पानी कम होने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है. इसकी वजह से व्यक्ति को बिना कोई काम किए ही थकान महसूस होने लगती है. साथ ही शरीर में दर्द, कमजोरी और भारीपन भी महसूस होता है.

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डिहाइड्रेशन का असर हमारे स्वभाव पर भी पड़ता है. शरीर में पानी की कमी होने पर व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगता है. ऐसे समय में तनावपूर्ण और मुश्किल हालात में शांत रहना व्यक्ति के लिए काफी मुश्किल हो जाता है.

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