एक या दो साल बाद भी लचक रही बच्चे की गर्दन, कहीं उसे ये बीमारी तो नहीं

अगर एक या दो साल बाद भी बच्चे की गर्दन में लचक है तो यह चिंता का विषय हो सकता है. कई बार इसका कारण जन्म के समय हुई समस्या हो सकती है. आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निकू वॉर्ड प्रभारी प्रो. अशोक कुमार बताते हैं कि बर्थ एस्फिक्सिया बेहद कॉमन समस्या है. यह नवजात शिशुओं में जन्म के समय होती है.
यह समस्या तब होती है, जब बच्चे के दिमाग को जन्म के समय पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है. इससे दिमाग को नुकसान हो सकता है और बच्चे की सामान्य ग्रोथ प्रभावित होती है.
बच्चा पैदा होने के तुरंत बाद न रो पाए, न सांस ले पाए, ये बर्थ एस्फिक्सिया के मुख्य लक्षण हैं. कई बार बच्चे को तुरंत ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है.
जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से दिमाग के कई हिस्से प्रभावित होते हैं, जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं. इसी वजह से एक या दो साल बाद भी गर्दन में लचक रह सकती है.
अगर बच्चे में ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें. फिजियोथेरेपी और नियमित एक्सरसाइज से काफी हद तक सुधार हो सकता है.
प्रेग्नेंसी के दौरान मां की सही देखभाल, समय पर डिलीवरी और जन्म के तुरंत बाद बच्चे की मॉनिटरिंग से इस समस्या को रोका जा सकता है.
अगर बच्चा देर से सिर उठाता है, बैठने में परेशानी होती है या गर्दन में लंबे समय तक लचक रहती है तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.