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IN PICS: जानें कौन थे अनुपम मिश्र

ABP News Bureau   |  19 Dec 2016 04:49 PM (IST)
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उनकी अन्य चर्चित किताबों में ‘राजस्थान की रजत बूंदें’ और ‘हमारा पर्यावरण’ है. ‘हमारा पर्यावरण’ देश में पर्यावरण पर लिखी गई एकमात्र किताब है. अनुपम मिश्र जयप्रकाश नारायण के साथ डकैतों के खात्मे वाले आंदोलन में भी सक्रिय रहे.

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अनुपम मिश्र का अपना कोई घर नहीं था. वह गांधी शांति फाउंडेशन के परिसर में ही रहते थे. उनके पिता भवानी प्रसाद मिश्र प्रख्यात कवि थे. मिश्र गांधी शांति प्रतिष्ठान के ट्रस्टी एवं राष्ट्रीय गांधी स्मारक निधि के उपाध्यक्ष थे.

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जल संरक्षण पर लिखी गई उनकी किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’ काफी चर्चित हुई और देशी-विदेशी कई भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ. पुस्तक की लाखों प्रतियां बिक चुकी है.

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अनुपम मिश्र पिछले सालभर से कैंसर से पीड़ित थे. मिश्र के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा, बड़े भाई और दो बहनें हैं. मिश्र को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार, जमना लाल बजाज पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है.

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गांधीवादी और मशहूर पर्यावरण विद अनुपम मिश्र अब हमारे बीच नहीं रहे. आज सुबह पांच बजकर चालीस मिनट पर एम्स अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली. अनुपम मिश्र 68 साल के थे.

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