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जानें क्या है GST बिल और इसके पास हो जाने के बाद कितनी बदल जाएगी आपकी जिंदगी!

एबीपी न्यूज़   |  21 Jul 2016 10:19 PM (IST)
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GST का लक्ष्य सप्लाई की दिक्कतों को खत्म करना और पूरे देश में अलग अलग राज्यों के टैक्स तंत्र से होने वाली दिक्कतों खत्म कर एक पारदर्शी सिस्टम बनाना है. जिससे कि हमें सामान की बिक्री और अदला बदली या किराए को तय करने में कोई परेशानी ना हो. पूरे देश में एक GST दर का फैसला हाल ही में बनी GST काउंसिल करेगी.

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GST पर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा बरपा है. आजकल हर न्यूज पेपर और न्यूज चैलनों पर GST बिल को लेकर खबर होती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं GST बिल से जुड़े सभी सवालों के जवाब आगे की स्लाइड्स में जानिए क्या है GST बिल और इसके पास हो जाने के बाद कितनी बदलेगी आपकी जिंदगी!

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किसी भी सामान और सेवा पर आपको टैक्स देना होता है. हर सामान और सेवा पर अपाको अप्रत्यक्ष रुप से टैक्स देना होता है. GST लागू हो जाने के बाद पूरे देश में एक समान टैक्स लगेगा अभी पूरे देश में सामान बनने और उसके वितरण की प्रकिया अलग-अलग है. जिसेक कारण पूरे देश में आपको अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है.

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GST बिल को UPA सरकार ने 2006 में लोकसभा में पास करवाया था. अब इस Constitutional Amendment (122nd Amendment) विधेयक को लोकसभा में भी मंजूरी दी जा चुकी है. GST जैसे जरुरी बिल को राज्य सभा में अभी तक विपक्षी दलों के विरोध के कारण पास नहीं कराया जा सका है. NDA सरकार को उम्मीद है कि इस मानसून सत्र में इस महत्वपूर्ण बिल को पास करा लिया जाएगा. सरकार चाहती है कि इस बिल को 2017 से पूरे देश में लागू कर दिया जाए.

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केंद्र सरकार GST बिल को पास कराने में सफल हो जाती है तो केंद्र की मोदी सरकार के 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'मेक इन इंडिया' को भी काफी फायदा होगा.

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GST के आ जाने के बाद से Multi-storeyed टैक्स दरों के आसान होने की समस्या खत्म हो जाएगी. GST सिस्टम के तहत टैक्स के तीन स्टेज होंगे सेंट्रल, स्टेट टैक्स जो 'सप्लाई' पर लगने वाला टैक्स होगा और तीसरा होगा इंटीग्रेटेड GST, जो राज्यों के बीच होने वाले सौदों पर आधारित होगा. इससे व्यापारियों और उद्योगपतियों को अपना लेखाजोखा रखने में और सरकार को पारदर्शी व्यवस्था बहाल करने में आसानी होगी.

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राज्य और केंद्र सरकारें अभी वस्तुओं पर अलग-अलग तरह से टैक्स लगाती हैं. केंद्र सरकार इंकल, सर्विस, सेंट्रल, सेल्स, एक्साइज ड्यूटी और सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स लगाती है. राज्य सरकारें वैट, एक्साइज, प्रॉपर्टी, एंट्री और एग्रीकल्चर टैक्स वसूलती है. राज्य सरकार द्वारा वसूले गए टैक्स से सामानों पर टैक्स बढ़ता है. जिसके कारण अलग-अलग जगह कीमते बदल जाती हैं.

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भारत दोहरे GST को लागू करने की तैयारी में है. जिसके सहत सेंट्रल GST को CGST और राज्य GST को SGST कहा जाएगा. GST को लागू करने में सबसे बड़ी रुकावट देश के सभी राज्यों के बीच तालमेल बिठाने की है. केंद्र और राज्य समान टैक्स दर पर तो लगभग सहमति बना चुके हैं लेकिन राज्यों के बीच होने वाले व्यापारिक सौदें की दरों, प्रशासनिक दक्षता और बुनियादी ढांचे की तैयारियों को लेकर सहमति बनने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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