दुश्मनों की आंखों में आंखें डालकर चुनौती दे रही है भारत की ये जांबाज बेटी

आदिवासियों से उषा इस तरह की घुल मिल गई हैं कि हाथ में बंदूक रखकर भय के बीच लोगों के लकड़ी के गट्ठर तक उठवा देती हैं. दिन हो या रात उषा कभी भी ऑपरेशन के लिए तैयार रहती हैं. साथी बताते हैं कि सर्चिंग के दौरान उषा का हौसला बाकी लोगों से एक कदम आगे ही होता है.
बस्तर में अब तक गांववालों और सुरक्षाबलों के बीच तालमेल नहीं होने की कहानियां आपने सुनी होंगी. कई बार जवानों पर रेप के आरोप भी लग चुके हैं. लेकिन उषा के आने के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं. उषा के आने के बाद बस्तर के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को नई किरन दिखी, अब गांव के लोग उषा को देखकर घरों से बाहर निकल आते हैं.
उषा किरन सीआरपीएफ की असिस्टेंट कमांडेंट हैं और पहली ऐसी महिला अफसर जिसने खुद कह कर नक्सलियों के इलाके में पहली पोस्टिंग ली. बेहद खतरनाक झीरम घाटी इलाके के जंगलों में हिंदुस्तान की इस बेटी का साहस ऐसा है कि हर पिता अपने घर में ऐसी ही बेटी चाहेगा.
गुड़गांव की रहने वाली उषा किरन ने सीआरपीएफ अकादमी कादरपुर गुड़गांव में सितंबर 2015 में ट्रेनिंग ज्वाइन की. सितंबर 2016 में पासआउट होने के बाद उषा ने दो महीने का काउंटर इनसर्जेंसी और एंटी टेररिज्म (CIAT) कोर्स भी किया.
उषा हाथों में एके 47 राइफल, बुलेटप्रूफ जैकेट, जैकेट में लगी राइफल की मैगजीन, कंधे पर वायरलेस सेट लेकर पूरी तैयारी के साथ मुकाबले के लिए निकलती हैं क्योंकि क्या पता कब दुश्मन सामने आ जाए.
भारतीय सेना के जवान हाल ही में खाने में शिकायतों के कारण चर्चा में आए. लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत की एक ऐसी बेटी के बारे में जो शौर्य की एक नई किरण है. छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाके में पहली बार एक महिला अफसर तैनात हुई है. इस दिलेर महिला अधिकारी ने खुद नक्सल इलाके की पोस्टिंग चुनी है और अब हाथों में एके-47 लेकर ये चप्पे-चप्पे पर नजर रखती है.