बाकी देशों के मुकाबले भारतीय जल्दी महसूस करने लगते हैं बूढ़ापा, जानें क्या कहती है ये चौंकाने वाली रिसर्च
बेशक भारतीय और चीनी उम्र के साथ होने वाली बीमारियों की रैंकिंग में बेहतर स्थान पर हैं. भारतीय इस फेहरिस्त में 138वें नंबर पर हैं. जबकि कम उम्र में बीमारयों के कारण बुढ़ापे की परेशानियों से जूझने की फेहरिस्त में भारत 159वें नंबर पर है.
रिसर्च में ये भी पाया गया कि कम उम्र में बुढ़ापे संबंधित समस्याएं से जूझने वाले लोगों को समय से पहले रिटायरमेंट, काम करने की क्षमता कम होना, शारीरिक क्षमताएं कम होना और सेहत में होने वाले खर्चे जैसी चीजें बढ़ सकती हैं.
अगर आप भारतीय हैं तो आपके लिए बुरी खबर है हाल ही में आई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जापान और स्विट्जरलैंड में रहने वाले लोगों के मुकाबले भारतीयों को कम उम्र में ही बुढ़ापे के नेगेटिव इफेक्ट्स से जूझना पड़ता है. जानिए क्या कहती है ये चौंकाने वाली रिसर्च.सभी फोटोः गेटी इमेज
इस रिसर्च के प्रमुख चैंग का कहना है कि ऐसे हालात में सरकार को ऐसे आंकड़ों को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधित जरूरतों और पॉलिसी पर दोबारा विचार करने की जरूरत है कि उनके देश के लोगों को किस उम्र में आने पर बुढ़ापे संबंधी समस्याएं शुरू हो रही हैं.
इस रिसर्च के दौरान 1990 से 2017 तक के बीच के 195 देशों और क्षेत्रों को शामिल किया गया.
रिसर्च में ये भी पाया गया कि उम्र के साथ होने वाली बीमारियों में जापान और स्विट्जरलैंड के बाद फ्रांस तीसरे स्थान पर है जहां औसतन 76 साल की उम्र में बुढ़ापे संबंधी बीमारियों लोगों को घेरती हैं. सिंगापुर इस मामले में 76 साल की उम्र के साथ चौथे स्थान पर है. कुवैत 75.3 वर्ष के साथ पांचवें स्थान पर है. वहीं 68.5 वर्ष के साथ अमेरिका 54वें स्थान पर है.
रिसर्च में पाया गया है कि 65 साल और सबसे कम उम्र में हेल्थ संबंधी समस्याओं से जूझने वालों के बीच लगभग 30 साल का अंतर है. ये बड़ा अंतर अलग-अलग देशों के लाइफस्टाइल पर सोचने पर मजबूर करता है.
इस तरह की रिसर्च पहली बार की गई है. ये रिसर्च द लांसेट पब्लिक हेल्थ में जर्नल में पब्लिश हुई है.
ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.