IN PICS: तमिल भाषी बाघ रामा कैसे सीखेगा मेवाड़ी!

दरअसल पैदाइश के समय से केयरटेकर चालिया राजन रामा की परवरिश करते थे. वे रामा के स्वभाव को भी अच्छी तरह जानते हैं. यहां तक की रामा तमिल भाषा को भी बड़ी अच्छी तरह समझता है. उसे जब तमिल में इंगे वा (यहाँ आ) या फिर अंगे पो (वहां जा) जैसे बातों को वो बड़े अच्छी तरह समझता था. लेकिन दिक्कत अब उदयपुर के केयरटेकर के लिए खड़ी हो गयी हैं. वन विभाग के अधिकारी शनमुगम ने बताया कि अरिग्नर अन्ना जुलॉजिकल पार्क चेन्नई में स्थानीय केयर टेकर वन्यजीवों के साथ तमिल में ही बात कर उनकी देखभाल करते हैं.
चेन्नई के सड़क मार्ग से उदयपुर ले जाने के लिए वाइट टाइगर को सोमवार को यहां से रवाना किया गया. ज़ू वालों के सामने मानो असमंजस की स्थिति पैदा हो गयी. दरअसल चेन्नई का रामा वाइट टाइगर केवल तमिल ही समझता है और क्योंकि अब उसे उदयपुर भेजा जा रहा है ऐसे में चुनौती ये कि इससे उसकी ही भाषा में बात कैसे की जाए.
ऐसे में यहां के वन्यजीव तमिल के ही कुछ शब्दों को सुनकर प्रतिक्रिया देते हैं. साथ ही कुछ दिनों के लिए रामा के साथ उसके केयरटेकर चालिया को भी भेजा गया है जिससे रामा को कोई दिक्कत न हो. ऐसे में उदयपुर पार्क के कर्मचारी कुछ दिन तमिल में इंगवा, अंगपो, करी सापड़ आदि बालते नजर आएंगे. भाषा की समस्या को देखते हुए चेन्नई के केयरटेकर को सात-आठ दिन के लिए सफेद बाघ के साथ उदयपुर भेजा गया है.
रामा को सोमवार रात को खाने में बीफ दिया गया था. मंगलवार शाम को उसे चिकन खिलाया गया. गुरुवार को उदयपुर पहुंचने की उम्मीद है. दरअसल इन जानवरों को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट किया जाता है. रामा को उदयपुर भेजा गया है जबकि जोधपुर और जयपुर से दो भेड़ियों को चेन्नई लाया गया है. अब क्योंकि उदयपुर में हिंदी और स्थानीय भाषा मेवाड़ी बोली जाती है. ऐसे में सफेद बाघ को हिंदी सिखाना होगा या कर्मचारियों को खुद तमिल भाषा सीखने की जरूरत पड़ेगी. दोनों काम बायोलॉजिकल पार्क के केयर टेकर और स्टाफ के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा.
उदयपुर ले जाये जा रहे वाइट टाइगर रामा को नॉर्मल रखने के लिए कैंटर को धीमी गति से चलाया जा रहा है. एक बोलेरो कैंटर में 7 सदस्यों की टीम सोमवार शाम को चेन्नई से रवाना हो चुकी है. 24 घंटे में टीम ने 800 किलोमीटर का सफर तय किया जा रहा है. चेन्नई के अरिग्नर अन्ना जूलॉजिकल पार्क से वाइट टाइगर को उदयपुर सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में लाने के लिए टीम चेन्नई से निकल चुकी है. लेकिन पार्क कर्मचारियों को एक नई चिंता सताने लगी थी कि सफेद बाघ सिर्फ तमिल भाषा ही समझता है जो उदयपुर के किसी कर्मचारी को नहीं आती.