बिना हाथ के जन्मे मोहनलाल ने पैरों को हथियार बनाकर सिखाया जीने का जज़्बा
क्यों, इसे पढ़कर आपको नहीं लगता की ज़िंदगी में कोई ऐसी परेशानी नहीं होती जो इसे बदल दे बल्कि आप हर परेशानी का रुख मोड़कर उसके बीच से अपने लिए रास्ता निकाल सकते हैं.
वहीं वे अपने पैरों से सिगरेट भी पी लेते हैं.
दरसअल ये तस्वीरें हरियाणा के फतेहाबाद से आई हैं. इनमें आप मदनलाल को देख सकते हैं. जन्म से ही मदनलाल के दोनों हाथ नहीं हैं लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. यहां तक कि उन्होंने हाथ के बजाए पैरों से आसानी से हो जाने वाला कोई काम ना चुनने की जगह दर्जी का काम चुना और अपने पैरों को अपने हाथों की तरह इस्तेमाल किया.
मदनलाल ने न सिर्फ अपने कामकाजी जीवन बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए भी अपने पैरों को ही अपना हाथ बना लिया. वे खाने तक के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं. वहीं वे अपने पैरों से सिगरेट भी पी लेते हैं.
अब हालात ये है कि मोहन गांव के पांच से सात बच्चों को सिलाई की ट्रेनिंग दे रहे हैं.
उनके इलाक में उन्हें सिलाई के लिए जाना जाता है. वे बताते हैं कि शुरू में तो लोग उन्हें शक की निगाहों से देखते रहे लेकिन बाद में उन्हें यकीन हो गया कि मदनलाल एक अच्छे दर्ज़ी हैं.
हम अक्सर अपनी ज़िंदगी में छोटी-बड़ी परेशानियों से निराश हो जाते हैं. कई बार सर्दी-बुखार जैसी मामूली बीमारियां भी हमें इतना दुखी कर जाती हैं कि हम बेहद बोझिल महसूस करने लगते हैं. ऐसे समय में हम अपना काम और शरीर दोनों छोड़कर बैठा जाते हैं लेकिन ये तस्वीरें देख आपको ज़िंदगी का एक बड़ा सबका मिलेगा.