जन्मदिन विशेषः प्यार और जिंदगी को कुछ ऐसे बयां करते हैं गुलजार
वो यार है जो खुशबू की तरह, वो जिंदगी जुबां उर्दू की तरह, वो जिसकी जुबां उर्दू की तरह, मेरी शाम रात, मेरी कायनात, वो यार मेरा सईंया-सईंया. फोटोः इंस्टाग्राम
कहीं किसी रोज यूं भी होता, हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके, वो रात तुमने गुजारी होती. फोटोः इंस्टाग्राम
हमने सपना देखा है कोई अपना देखा है, जब रात का घूंघट उतरेगा और दिन की डोली गुजरेगी, तब सपना पूरा होगा, थोड़ा है थोड़े की जरूरत है, जिंदगी फिर भी यहां खूबसूरत है. फोटोः इंस्टाग्राम
एक बार वक्त से, लम्हा गिरा कही, वहा दास्ताँ मिली, लम्हा कही नहीं, थोड़ा सा हँसा के, थोड़ा सा रुला के, पल ये भी जानेवाला है. फोटोः इंस्टाग्राम
हम ने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू, हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम ना दो, सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो, प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो. फोटोः इंस्टाग्राम
सुनो.... जरा रास्ता तो बताना, मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी. फोटोः इंस्टाग्राम
आइना देख कर तसल्ली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई. फोटोः इंस्टाग्राम
न मैं उतारूंगा अब साँसों के साहिल से, न वो उतारेगी मेरे आसमान पर झूलते तारों के पींगों से, मगर जब कहते कहते दास्ताँ फिर वक़्त ने लम्बी जम्हाई ली, न वो ठहरी ना मैं रोक पाया था, बहुत फूँका सुलगते चाँद को फिर भी उसे एक एक कला घटते हुए देखा, बहुत खींचा समंदर को मगर साहिल तलक हम ला नहीं पाये, सहर के वक़्त फिर उतरे हुए साहिल पे एक डूबा हुआ खाली समंदर था. फोटोः इंस्टाग्राम
क्या पता कब कहाँ मारेगी? बस कि मैं ज़िंदगी से डरता हूँ, मौत का क्या है, एक बार मारेगी. फोटोः इंस्टाग्राम
गुलजार साहब के युवा से लेकर बुजुर्ग तक दीवाने हैं. वे शब्दों के मास्टर हैं जो कि लाखों दिलों में घर कर जाते हैं. उनके शब्दों में प्यार, हार्टब्रेक, निराशा, बोंड, सैडनेस, दुख और बहुत कुछ बयां होता है. आज हम आपको गुलजार साहब की लिखी हुई कुछ ऐसी पंक्तियां बताने जा रहे हैं जिनकी गहराईयों में प्यार और जिंदगी का असल मतलब छिपा है. फोटोः इंस्टाग्राम
उड़ के जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा, देर तक हाथ हिलती रही वह शाख़ फ़िज़ा में, अलविदा कहने को? या पास बुलाने के लिए? फोटोः इंस्टाग्राम
गुलजार साहब ऐसे लेखक और शायर हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं. आप उन्हें कवि, शायर, महान गीतकार, फिल्मकार, कथाकार, निबंधकार, निर्देशक, अनुवादक या बाल साहित्यकार कुछ भी कह सकते हैं. आज गुलजार साहब अपने जीवन के 84वां पड़ाव पार कर चुके हैं. फोटोः इंस्टाग्राम