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Blood Letter Crime: अपने खून से चिट्ठी लिखना भी होता है जुर्म, जानें किन धाराओं में हो सकती है सजा?

स्पर्श गोयल   |  06 Jan 2026 05:44 PM (IST)
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अगर खून से लिखा कोई पत्र किसी व्यक्ति, संस्था या फिर सार्वजनिक प्राधिकरण को धमकाने, दबाव डालने या फिर मनोवैज्ञानिक रूप से डराने के लिए भेजा जाता है तो इसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी माना जाता है.

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खून से लिखे पत्र में अगर मौत, गंभीर चोट या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी शामिल होती है तो अपराध को गंभीर माना जाता है. ऐसे मामलों में 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. कानून सिर्फ भेजने वाले के इरादे पर नहीं बल्कि पढ़ने वाले की मानसिक स्थिति पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान देता है.

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खून से लिखने के लिए व्यक्ति को खुद को चोट पहुंचानी पड़ती है. अगर खुद को नुकसान पहुंचाने का यह काम किसी सरकारी कर्मचारी, प्राधिकरण या फिर संस्था पर काम करने के दबाव डालने के लिए किया जाता है तो इस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 226 लागू हो सकती है. इसके तहत जुर्माना या फिर जेल की सजा दी जा सकती है.

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अगर खून से लिखा कोई पत्र सार्वजनिक रूप से फैलाया जाता है, दिखाया जाता है या इस तरह से शेयर किया जाता है जिससे डर, घबराहट या सामाजिक तनाव पैदा हो तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत आ सकता है. इस धारा का इस्तेमाल तब किया जाता है जब ऐसे कामों को सार्वजनिक व्यवस्था फिर सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से किया जाए.

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अगर किसी महिला को खून से लिखा हुआ खत भेजा जाता है और इससे उसे बार-बार डर, भावनात्मक परेशानी या फिर मानसिक दबाव होता है तो इसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 के तहत मानसिक उत्पीड़न या पीछा करना माना जा सकता है.

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इंसानी खून को बायोहाजर्ड माना जाता है. इसे डाक या कूरियर सेवाओं के जरिए भेजना स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है. इससे भेजने वाले पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इतना ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर खून से लिखे खत की तस्वीर या फिर वीडियो पोस्ट करने पर आईटी एक्ट के तहत भी कार्यवाही हो सकती है. इसमें एफआईआर दर्ज करना, अकाउंट सस्पेंड करना और हिंसा या फिर धमकी भरी सामग्री फैलाने के लिए कंटेंट को हटाना शामिल है.

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