अंधेरा होने पर हमें दिखाई देना क्यों बंद हो जाता है, कभी सोचा है?
दरअसल, हम जब रात के समय असमान में देखते हैं तो पूरी तरह न सही लेकिन कुछ हद तक चीजों को देख पाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानों का शरीर और उसकी कैपेबिलिटी समय के साथ इवोल्व हुई हैं.
हमारी आंखें किसी चीज को तब देख पाती हैं, जब उसपर लाइट पड़ती है. फिर वो लाइट ऑब्जेक्ट से टकराकर हमारी आंखों में जाती है और हम किसी चीज को देख पाते हैं.
ऐसे में जब हम किसी अंधेरे कमरे में जाते हैं, जहां कहीं लाइट की एक रोशनी भी नहीं होती तो हमें कुछ दिखाई नहीं देता क्योंकि लाइट की एब्सेंस में ये रिफ्लेक्शन नहीं होता.
हमारी आंखों में फोटो रिसेप्टर्स मौजूद होते हैं, जो लाइट को रिसीव करते हैं और ब्रेन को इमेज बनाने में मदद करते हैं.
ये सभी कोंस रिसेप्टर्स रेटीना में मौजूद होते हैं, जिनसे कलर आइडेंटिफाई किए जाते हैं. इसके अलावा रॉड रिसेप्टर्स लो लाइट कंडीशन में देखने में मदद करते हैं.
जब लाइट अचानक ऑफ होती है या अंधेरा हो जाता है तो कोन्स सेल्स काम करना बंद कर देते हैं और हमें कुछ भी दिखाई नहीं देता.
इसके कुछ देर बाद रॉड सेल्स जैसे ही काम करना शुरू करते हैं तो हमें दिखाई देने लगता है और हम धुंधली चीजें पहचानने लगते हैं. इस प्रोसेस को डार्क एडॉप्टेशन कहते हैं.