✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

क्यों चांद पर इतना पैसा खर्च करती हैं स्पेस एजेंसियां, इससे क्या होता है फायदा?

निधि पाल   |  09 Sep 2026 02:20 PM (IST)
क्यों चांद पर इतना पैसा खर्च करती हैं स्पेस एजेंसियां, इससे क्या होता है फायदा?

दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां इन दिनों चांद पर अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रही हैं. पहली नजर में यह आम लोगों को पैसों की बर्बादी लग सकता है, लेकिन इसके पीछे गहरी वैज्ञानिक और आर्थिक वजहें छिपी हैं. चांद केवल एक बेजान उपग्रह नहीं, बल्कि भविष्य के संसाधनों का खजाना और अंतरिक्ष विज्ञान की नई कुंजी बन चुका है. वहां पानी की खोज, बेशकीमती खनिज और मंगल ग्रह तक पहुंचने की योजनाएं जुड़ी हैं. इस वजह से अमेरिका, चीन और भारत समेत दुनिया के कई बड़े देश चंद्र मिशन पर अरबों रुपये खर्चा कर रहे हैं.

1

चांद की सतह पर कई ऐसे कीमती संसाधन मौजूद हैं, जो धरती पर तेजी से खत्म हो रहे हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि वहां हीलियम-3 भारी मात्रा में उपलब्ध है, जो भविष्य में बिना प्रदूषण के असीमित बिजली पैदा करने के काम आ सकता है.

Continues below advertisement
2

इसके अलावा, चांद की मिट्टी और चट्टानों में टाइटेनियम, लोहा और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं. चांद के ध्रुवीय इलाकों में बर्फ के रूप में पानी का पता चला है, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा ही बदल दी है.

Continues below advertisement
3

यह पानी केवल अंतरिक्ष यात्रियों के पीने के काम ही नहीं आएगा, बल्कि इसे तोड़कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन बनाई जा सकती है. ऑक्सीजन से सांस लेने की सुविधा मिलेगी और हाइड्रोजन का इस्तेमाल रॉकेट ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे भविष्य में अभियानों का खर्च काफी कम हो जाएगा.

4

अंतरिक्ष एजेंसियां चांद को एक ट्रेनिंग ग्राउंड और टेस्टिंग लैब की तरह देख रही हैं. धरती से चांद की दूरी लगभग 3,84,000 किलोमीटर है, जहां महज तीन दिनों में पहुंचा जा सकता है. मंगल जैसे दूर के ग्रहों पर इंसानों को भेजने से पहले चांद पर लाइफ सपोर्ट सिस्टम और नई तकनीकों की जांच की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाई जा सके.

5

चांद का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की तुलना में बहुत कम है. इस वजह से चांद की सतह से किसी रॉकेट को अंतरिक्ष में छोड़ना धरती के मुकाबले काफी आसान और बेहद सस्ता होता है.

6

एक बार चांद पर स्थाई बेस बन जाने के बाद, गहरे अंतरिक्ष और दूसरे ग्रहों की ओर जाने वाले स्पेसक्राफ्ट को वहीं से लॉन्च किया जाएगा, जिससे ईंधन की भारी बचत होगी. चांद पर चल रहे रिसर्च का सीधा फायदा आम इंसान की जिंदगी को भी मिल रहा है.

7

अंतरिक्ष मिशनों के लिए बनाई जाने वाली नई तकनीकें, जैसे उन्नत वॉटर प्यूरिफायर, बेहतर सोलर पैनल और मेडिकल उपकरण, बाद में धरती पर इस्तेमाल में आती हैं. अनुमान है कि साल 2050 तक चंद्र अर्थव्यवस्था (लूनर इकोनॉमी) सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे.

8

अंतरिक्ष में अपनी बढ़त साबित करने के लिए अमेरिका की नासा और चीन के बीच एक नई रेस शुरू हो चुकी है. भारत जैसे देश भी अपने कम लागत वाले अभियानों से इस प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हैं.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • जनरल नॉलेज
  • क्यों चांद पर इतना पैसा खर्च करती हैं स्पेस एजेंसियां, इससे क्या होता है फायदा?
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.