Power Bank Blast: पावर बैंक जल्दी फट जाते हैं, लेकिन मोबाइल बैटरी नहीं, क्यों होता है ऐसा?
मोबाइल फोन की बैटरी काफी ज्यादा सख्त क्वालिटी चेक के तहत बनाई जाती है. ब्रांड ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और लंबे समय तक चलने की क्षमता के लिए सेल की टेस्टिंग में काफी ज्यादा निवेश करते हैं. वहीं पावर बैंक, खास कर सस्ते या नकली वाले अक्सर इन सख्त स्टैंडर्ड को नजरअंदाज कर देते हैं. खराब बैटरी सेल, रीसायकल किए गए कंपोनेंट और पुराने डिजाइन अंदरूनी खराबी का खतरा काफी बढ़ा देते हैं. इस वजह से फटने की संभावना ज्यादा हो जाती है.
स्माटफोन काफी एडवांस्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करता है. जो लगातार वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग स्पीड और पावर फ्लो पर नजर रखता है. अगर कुछ भी गलत होता है तो सिस्टम तुरंत पावर को काट देता है. लेकिन कई सस्ते पावर बैंक बेसिक या खराब डिजाइन वाले प्रोटक्शन सर्किट का इस्तेमाल करते हैं.
फोन को गर्मी को मैनेज करने के लिए डिजाइन किया जाता है. अंदरुनी लेआउट, मेटल फ्रेम और सॉफ्टवेयर कंट्रोल सभी मिलकर ज्यादा तापमान बढ़ने से रोकते हैं. दूसरी तरफ पावर बैंक अक्सर कम वेंटिलेशन वाले प्लास्टिक के खोल में कसकर पैक किए जाते हैं. गर्मी को बाहर निकालने की जगह नहीं मिल पाती और वह बैटरी के अंदर जमा हो जाती है. इसी वजह से फटने की संभावना बढ़ जाती है.
मोबाइल फोन को काफी सावधानी से इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि वह महंगे होते हैं. वहीं पावर बैंक बैग पैक में ऐसे ही पड़े रहते हैं, किताबों के बीच दबा दिए जाते हैं या अक्सर गिरा दिए जाते हैं. मामूली फिजिकल नुकसान भी लिथियम बैटरी के अंदरूनी स्ट्रक्चर को खराब कर सकता है.
लोग अक्सर पावर बैंक को बिना ध्यान दिया चार्ज करते हैं. कभी तकिया के नीचे, बैग के अंदर या सीधे धूप में. वैसे तो गर्मी पहले ही बाहर नहीं निकाल पाती ऊपर से तापमान बढ़ने की वजह से फटने की संभावना और बन जाती है. वहीं स्मार्टफोन तापमान बढ़ने पर चार्जिंग धीमी करने या पूरी तरह से बंद करने के लिए काफी स्मार्ट होते हैं.
पावर बैंक बनाने वाली कंपनियां अक्सर कम कीमत पर ज्यादा कैपेसिटी बेचने पर ध्यान देती है. ऐसा करने के लिए सुरक्षा फीचर्स को कभी-कभी कम कर दिया जाता है या उनसे समझौता किया जाता है. मोबाइल फोन में सबसे पहली प्राथमिकता यूजर की सुरक्षा को ही दी जाती है.