Types Of Passport: क्यों होते हैं अलग-अलग रंगों के पासपोर्ट? जानें इसके पीछे की वजह

Types Of Passport: पासपोर्ट सिर्फ ट्रैवल डॉक्यूमेंट नहीं होते, बल्कि वह अपने रंग से जरूरी जानकारी भी देते हैं. पासपोर्ट का रंग इमीग्रेशन अधिकारियों को होल्डर का स्टेटस, यात्रा का मकसद और डिप्लोमेटिक खास अधिकार के लेवल को जल्दी पहचान में मदद करता है. भारत और दुनिया भर में पासपोर्ट के अलग-अलग रंग होते हैं. आइए जानते हैं सभी रंगों का मतलब.
नीला पासपोर्ट भारत में जारी किया जाने वाला सबसे आम पासपोर्ट है. यह टूरिज्म, एजुकेशन या बिजनेस जैसे पर्सनल कामों के लिए विदेश जाने वाले आम नागरिकों को दिया जाता है. इस पासपोर्ट को ऑफीशियली टाइप P या फिर पर्सनल पासपोर्ट के नाम से जाना जाता है.
सफेद पासपोर्ट उन लोगों को दिया जाता है जो ऑफीशियली सरकारी ड्यूटी पर विदेश जाते हैं. यह उन सरकारी कर्मचारियों को जारी किया जाता है जो एडमिनिस्ट्रेटिव या ऑफिशियल हैसियत से भारत को लीड करते हैं. इस टाइप S या सर्विस पासपोर्ट के नाम से जाना जाता है.
मैरून या लाल पासपोर्ट भारत में सबसे पॉवरफुल पासपोर्ट है. यह डिप्लोमेट, सीनियर सरकारी अधिकारी, एंबेसडर और संसद सदस्यों को जारी किया जाता है. इसे टाइप D या डिप्लोमेटिक पासपोर्ट के नाम से जाना जाता है. यह विदेश में तेज इमीग्रेशन क्लीयरेंस और डिप्लोमेटिक सुरक्षा जैसे खास अधिकार देता है.
ऑरेंज पासपोर्ट इमीग्रेशन चेक रिक्वायर्ड कैटेगरी के नागरिकों के लिए शुरू किया गया था. यह उन लोगों के लिए होता है जिन्होंने हायर लेवल की फॉर्मल एजुकेशन पूरी नहीं की. इसका मकसद अधिकारियों को नौकरी के लिए विदेश यात्रा करने वाले वर्कर की पहचान करने में मदद करना है.
पूरी दुनिया में पासपोर्ट के रंग अक्सर पॉलिटिकल गठबंधन और रीजनल पहचान दिखाते हैं. यूरोपीय यूनियन के कई देश लाल पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. उनके लिए यह रंग एकता और ऐतिहासिक रिश्तों की निशानी है. नॉर्थ और साउथ अमेरिका देश आमतौर पर नीले पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यह उनके लिए नई दुनिया की पहचान दिखाता है. मुस्लिम बहुल देशों में हरे रंग के पासपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल होता है. क्योंकि इस्लाम में इस रंग का धार्मिक महत्व है. इसी के साथ काला और सबसे दुर्लभ रंग न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका देश द्वारा इस्तेमाल किया जाता है.
पासपोर्ट का रंग इमीग्रेशन अधिकारियों को हर डिटेल की तुरंत जांच किए बिना यात्री का स्टेटस जल्दी पहचान में काफी मदद करता है. इससे वेरिफिकेशन तेज होता है और सिक्योरिटी भी बेहतर होती है.