पार्सल का हर डिब्बा भूरे रंग का ही क्यों होता है? जानें दिलचस्प वजह

ई-कॉमर्स के दौर में जब भी हमारे घर पर ऑनलाइन डिलीवरी आती है, तो सामान एक खास भूरे रंग के कार्डबोर्ड बॉक्स में पैक होकर पहुंचता है. चाहे छोटा पार्सल हो या कोई बड़ी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कंपनियों द्वारा अधिकतर भूरे डिब्बों का ही इस्तेमाल किया जाता है. क्या आपने कभी सोचा है कि पार्सल डिब्बों को किसी और चमकीले या आकर्षक रंग में तैयार क्यों नहीं किया जाता? दरअसल इसके पीछे कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि कागज बनाने का प्राकृतिक तरीका, डिब्बे की मजबूती, पैकेजिंग का बजट और पर्यावरण सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक कारण शामिल हैं.
पार्सल डिब्बे बनाने के लिए मुख्य रूप से क्राफ्ट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है, जो लकड़ी की पल्प (सेलूलोज फाइबर) से तैयार होता है. निर्माण की शुरुआत में कागज का मूल रंग स्वाभाविक रूप से भूरा या मटमैला ही होता है.
अगर इस कागज को सफेद या किसी दूसरे रंग में बदलना हो, तो उसे कई तरह के रसायनों और ब्लीचिंग प्रोसेस से गुजारना पड़ता है. कंपनियां पैकेजिंग के डिब्बे बनाते समय अतिरिक्त ब्लीचिंग नहीं करतीं, जिससे कागज अपने प्राकृतिक भूरे रूप में ही डिब्बे की शक्ल ले लेता है.
डिब्बों को आकर्षक या रंगीन बनाने के लिए अतिरिक्त डाई, ब्लीच और केमिकल प्रिंटिंग की जरूरत होती है. रोजमर्रा की डिलीवरी और सामान को एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित पहुंचाने के लिए सजावट के बजाय उपयोगिता ज्यादा अहम होती है.
अगर साधारण पार्सल डिब्बों को सफेद या रंगीन बनाया जाए, तो पैकेजिंग का खर्च काफी बढ़ जाएगा. ई-कॉमर्स और कूरियर कंपनियां अपने लॉजिस्टिक्स बजट को कम रखने के लिए साधारण और प्राकृतिक क्राफ्ट पेपर से बने भूरे डिब्बों को ही प्राथमिकता देती हैं.
भूरे रंग का क्राफ्ट पेपर अपनी प्राकृतिक संरचना के कारण बहुत मजबूत और टिकाऊ माना जाता है. इस कागज की कई परतों को जोड़कर लहरदार गत्ता (कोरुगेटेड कार्डबोर्ड) तैयार किया जाता है. यह डिजाइन परिवहन के दौरान लगने वाले झटकों, वजन के दबाव और टूट-फूट से अंदर रखे सामान की पूरी सुरक्षा करता है.
लंबे समय तक सामान सुरक्षित रखने और भारी लोड सहने की इसी क्षमता की वजह से ऑनलाइन शॉपिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, किताबों और कपड़ों की पैकिंग में भूरे कार्डबोर्ड का उपयोग होता है.
हालांकि ज्यादातर साधारण पार्सल डिब्बे भूरे ही दिखाई देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि दूसरे रंग का डिब्बा बनाया ही नहीं जा सकता है. कई प्रीमियम ब्रांड्स और कॉस्मेटिक कंपनियां अपनी पहचान चमकाने के लिए डिब्बों पर सफेद, लाल, नीले या काले रंग की प्रिंटिंग करवाती हैं.
इसके बावजूद, आम कूरियर और सामान्य सामान की रसद में बिना किसी भारी प्रिंटिंग वाले भूरे डिब्बे ही इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि यह हर तरह से सबसे व्यावहारिक और किफायती तरीका साबित होता है.