Flag Colors Meaning: ज्यादातर झंडों में लाल-सफेद और नीले रंग ही क्यों होता है इस्तेमाल? जानें इसके पीछे का इतिहास
पुराने और मिडिल एज के समय में पक्के रंग बनाना काफी मुश्किल था. लाल और नीले रंग सबसे ज्यादा टिकाऊ थे और धूप, बारिश और खराब मौसम से फीके नहीं पड़ते थे. कपड़े को ब्लीच करके आसानी से सफेद कपड़ा बनाया जा सकता था. इसी के साथ पीले या फिर काले जैसे रंगों को बनाए रखना काफी मुश्किल था और बनाना भी महंगा था.
पहले झंडे जहाज और लड़ाई के मैदानों में इस्तेमाल होते थे. यहां विजिबिलिटी काफी जरूरी थी. लाल, सफेद और नीला रंग मिलकर एक मजबूत कंट्रास्ट बनाते हैं. जिससे लंबी दूरी से या खराब मौसम में भी झंडों को पहचानना आसान हो जाता है.
इतिहास के कुछ सबसे दमदार देशों ने अपने झंडो में लाल, सफेद और नीले रंग का इस्तेमाल किया. इससे दूसरों को भी ऐसे डिजाइन अपनाने की प्रेरणा मिली. नीदरलैंड 16वीं सदी में लाल, सफेद और नीले तिरंगे को अपनाने वाले पहले देशों में से एक था.
फ्रांस का लाल, सफेद और नीला तिरंगा फ्रांसीसी क्रांति के दौरान आजादी, बराबरी और डेमोक्रेसी का दुनिया भर में निशान बन गया. कई देशों ने अपने आजादी के आंदोलन और डेमोक्रेटिक आदर्श को दिखाने के लिए इसी कलर स्कीम को अपनाया.
यूनाइटेड किंगडम का यूनियन जैक जिसमें लाल, सफेद और नीला रंग है, ने कई पुराने ब्रिटिश कॉलोनी के झंडों पर असर डाला. ऑस्ट्रेलिया, न्यू जीलैंड और दूसरे देशों ने आजादी मिलने के बाद भी इन रंगों को अपनी नेशनल पहचान के हिस्से के तौर पर बनाए रखा.
ये रंग यूनिवर्सल वैल्यूज को भी दिखाते हैं. लाल रंग अक्सर हिम्मत, त्याग और ताकत की निशानी होता है. सफेद रंग शांति, पवित्रता और ईमानदारी की निशानी हैं. नीला रंग इंसाफ, स्टेबिलिटी और सावधानी की निशानी है.